

जो वीडियो ने मचाया बवाल… क्या आपने उसकी पूरी सच्चाई सुनी? विधायक ने रखा अपना पक्ष, बताई उस दिन की भावुक मुलाकात…! “मेरी भावनाओं को अधूरा दिखाया गया, किसी समाज या संगठन का अपमान करने का कभी उद्देश्य नहीं था” – शकुंतला सिंह पोर्ते
आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ था…? जिस बयान पर मचा बवाल, अब सामने आया पूरा पक्ष, भावुक होकर विधायक ने कही बड़ी बात, पूरी कहानी जानकर बदल सकता है नजरिया
चंद्रिका कुशवाहा
सूरजपुर। हरिनंदन राजवाड़े हत्याकांड के बाद पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान दिए गए बयान को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के बीच प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने पहली बार विस्तार से अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि जिस वीडियो को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह उनकी पूरी बात नहीं बल्कि उसका एक संपादित (एडिट) हिस्सा है। उनका कहना है कि पूरी बातचीत का संदर्भ अलग था, जबकि कुछ सेकंड के अंश को प्रसारित किए जाने से उनके कथन का अर्थ बदल गया।
विधायक ने राष्ट्रहित न्यूज से विशेष बातचीत में बताया कि हरिनंदन राजवाड़े की हत्या के समय वह प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में मौजूद नहीं थीं। वह महाकालेश्वर और भगवान जगन्नाथपुरी के दर्शन के लिए गई हुई थीं। वहीं उन्हें इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि समाचार सुनते ही मन अत्यंत व्यथित हो गया और उसी समय उन्होंने तय कर लिया कि क्षेत्र लौटते ही सबसे पहले पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाएंगी और न्याय दिलाने का भरोसा देंगी।
उन्होंने बताया कि प्रतापपुर पहुंचने के बाद वह सीधे हरिनंदन राजवाड़े के घर पहुंचीं। वहां का माहौल बेहद दर्दनाक था। परिवार के लोगों का विलाप देखकर वह स्वयं भी भावुक हो गईं। विधायक ने कहा, “जब माता-पिता और परिजनों को रोते देखा तो मेरी आंखों से भी आंसू निकल आए। उस समय मैं एक जनप्रतिनिधि से पहले एक बेटी, एक बहन और एक मां की तरह उस परिवार का दुख महसूस कर रही थी।”
विधायक ने कहा कि हरिनंदन राजवाड़े की निर्मम हत्या केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे प्रतापपुर क्षेत्र का दर्द है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्दोष युवक की इस तरह हत्या होना समाज के लिए बेहद गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी इस प्रकार का जघन्य अपराध करने का साहस न कर सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार से सामान्य बातचीत के दौरान उन्होंने भावनात्मक रूप से यह कहा था कि हत्या जैसे गंभीर मामलों में यदि कोई दोषियों को बचाने का प्रयास करता है तो उसका परिणाम समाज और परिवार पर भी पड़ता है तथा अंततः न्याय और ईश्वर सब देखते हैं। उनके अनुसार यह बातचीत आम बोलचाल और पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के दौरान हुई थी। उनका उद्देश्य किसी भी पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, समाज, संगठन या किसी व्यक्ति विशेष का अपमान करना नहीं था।
शकुंतला सिंह पोर्ते ने कहा कि वह स्वयं भी पेशे से अधिवक्ता हैं और कानून, न्यायपालिका तथा संविधान का पूरा सम्मान करती हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हैं और उनके मन में किसी भी संस्था या समुदाय के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है।
विधायक ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल किया जा रहा है, वह पूरी बातचीत नहीं है। उनके अनुसार वीडियो के आगे-पीछे के हिस्से को हटाकर केवल एक अंश प्रसारित किया गया है, जिससे लोगों के सामने अलग तस्वीर प्रस्तुत हुई। उन्होंने कहा कि किसी भी वक्तव्य को उसकी पूरी पृष्ठभूमि और संदर्भ के साथ देखा जाना चाहिए, तभी उसका वास्तविक आशय समझ में आएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते पीड़ित परिवारों तक पहुंचना, उनका दर्द सुनना और न्याय का भरोसा दिलाना उनकी जिम्मेदारी है। वर्षों से प्रतापपुर विधानसभा की जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि बनाया है और उन्होंने हर वर्ग, हर समाज तथा हर जरूरतमंद के सुख-दुख में सहभागी बनने का प्रयास किया है। चाहे प्राकृतिक आपदा हो, किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटा हो या किसी गरीब को सहायता की आवश्यकता रही हो, उन्होंने बिना किसी भेदभाव के लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनी हैं।
विधायक ने कहा कि कुछ लोग उनकी बातों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत कर उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम लिए बिना केवल इतना कहा कि जनता सत्य को समझती है और वह हमेशा सच के साथ खड़ी रहेगी।
अंत में विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने क्षेत्रवासियों से शांति, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि “मेरे प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र का हर नागरिक मेरे परिवार का सदस्य है। किसी भी परिवार पर संकट आएगा तो मैं पहले की तरह उसके साथ खड़ी रहूंगी। मेरा उद्देश्य किसी को आहत करना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार के आंसू पोंछना और उन्हें न्याय दिलाने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाना है। मेरे लिए प्रतापपुर की जनता का विश्वास सबसे बड़ी ताकत है और मैं हमेशा उनके सुख-दुख में उनके साथ रहूंगी।
यदि मेरे किसी शब्द से किसी भी समाज, संगठन या व्यक्ति की भावना आहत हुई है तो मैं हृदय से क्षमा प्रार्थी हूं।”








