शिकायत के बाद अचानक ‘प्रकट’ हुई दुकान! पोस्टर-बैनर लगाकर बचाव की कोशिश या जांच से पहले सबूत गढ़ने की तैयारी?


धरमजयगढ़। ग्राम पंचायत पारेमेर में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर दर्ज शिकायत के बाद अब पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। शिकायतकर्ता और ग्रामीणों का दावा है कि जिस वेंडर की फर्म के अस्तित्व पर सवाल उठाए गए थे, उसी फर्म के नाम का पोस्टर-बैनर अब शिकायत दर्ज होने के बाद अचानक घर की दीवारों पर दिखाई देने लगा है। इसे लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जो पहचान पहले कभी नजर नहीं आई, वह शिकायत के बाद अचानक कैसे सामने आ गई?

वहीं ग्रामीणों के अनुसार, शिकायत दर्ज होने से पहले संबंधित फर्म के नाम का न तो कोई बोर्ड दिखाई देता था, न दुकान का कोई स्पष्ट चिन्ह और न ही किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि क्षेत्र में देखने को मिली थी। उनका कहना है कि अब, जब पूरा मामला प्रशासनिक जांच के अधीन है, तब फर्म के नाम का पोस्टर-बैनर लगाकर दुकान होने का आभास कराया जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह सब जांच एजेंसियों को भ्रमित करने तथा संभावित कार्रवाई से बचने का प्रयास हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

और इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि संबंधित वेंडर द्वारा उक्त पोस्टर को अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर भी साझा किया जा रहा है, जिससे यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्म विधिवत संचालित है। लेकिन वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि फर्म पहले से सक्रिय थी तो उसका स्पष्ट भौतिक अस्तित्व शिकायत से पूर्व क्यों दिखाई नहीं दिया? और फिर बिना तिथि दर्ज बिल जारी और पंचायत द्वारा संबंधित को भुगतान आखिर किसके आदेश पर की गई है। यह प्रश्न अब जांच का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।

बहरहाल शिकायतकर्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे जांच दल की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं और उसके बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई करेंगे। उनका कहना है कि यदि वित्तीय अनियमितता या शासकीय राशि के दुरुपयोग के तथ्य सामने आते हैं, तो वे पूरे प्रकरण को अंतिम स्तर तक ले जाएंगे और कथित भ्रष्टाचार के विरुद्ध कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक जांच के अधीन है। जांच एजेंसियां उपलब्ध दस्तावेजों, अभिलेखों तथा भौतिक तथ्यों का परीक्षण कर रही हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत के बाद लगाए गए पोस्टर-बैनर वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि का प्रमाण सिद्ध होते हैं या फिर जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के बीच एक नया विवाद बनकर उभरते हैं। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच प्राधिकारी की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
spot_img
spot_img

अपना न्यूज़ पोर्टल - 9340765733

spot_img
spot_img
spot_img

Recent Posts

“2 लाख की शर्त ने मचाया बवाल! जनपद पंचायत की कैंटीन नीलामी पर उठे गंभीर सवाल, क्या बड़े व्यापारी को पहुंचाया जा रहा फायदा?”

11 महीने की कैंटीन के लिए 2 लाख की अमानत राशि से छोटे व्यापारी बाहर! निष्पक्षता और पारदर्शिता पर उठे सवाललैलूंगा | विशेष रिपोर्टजनपद...

CHHATTISGARH NEWS

विकास की नहीं, इस बार बेटी की बड़ी उपलब्धि से चर्चा में आईं प्रतापपुर विधायक..! सुपुत्री ने देश के नामी कॉलेज में हासिल किया...

प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते की सुपुत्री तन्वी सिंह पोर्ते ने बढ़ाया सरगुजा का मान, दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में मिला प्रवेश, देश...

RAIGARH NEWS

डीएमएफ मद से जिले के विकास कार्यों को मिली रफ्तार स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसंरचना के विकास को मिली नई गति 15.85 करोड़ रुपये की...

रायगढ़ - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी के प्रयासों से जिले के खनिज प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास...