लैलूंगा, रायगढ़ | 18 अगस्त 2026
बारिश की झड़ी के बीच खेतों में उतरा कृषि विभाग का अमला! लैलूंगा क्षेत्र में सुगंधित जौफुल धान की जैविक खेती, सन बीज उत्पादन और किसान आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संयुक्त संचालक कृषि बिलासपुर राठौर एवं उपसंचालक कृषि रायगढ़ ने क्षेत्र का संयुक्त भ्रमण किया। अधिकारियों ने न केवल विभागीय योजनाओं की समीक्षा की, बल्कि खराब मौसम के बावजूद किसानों के खेतों तक पहुंचकर फसलों और जैविक खेती की तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
दफ्तर में बैठक, खेत में सीधा निरीक्षण—योजनाओं के क्रियान्वयन पर कसा शिकंजा
भ्रमण की शुरुआत वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय लैलूंगा में कृषि विभाग के मैदानी अमले की बैठक से हुई। बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, एग्री स्टेक, फसल स्थिति और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित विभिन्न योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।
संयुक्त संचालक राठौर ने अधिकारियों-कर्मचारियों को योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा पात्र किसानों को समय पर योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।
मूसलाधार बारिश भी नहीं रोक सकी कदम, किसानों के खेत पहुंचे अधिकारी
बैठक के बाद बारिश के बीच अधिकारी किसानों के खेतों तक पहुंचे। यहां क्षेत्र में की जा रही सुगंधित जौफुल धान की तकनीकी खेती का अवलोकन किया गया। खेतों में किसानों द्वारा अपनाए जा रहे जीवामृत एवं हरी खाद जैसी जैविक तकनीकों को भी देखा गया और अधिकारियों ने इसकी सराहना की।
जौफुल धान को मिले प्रीमियम दाम, जैविक प्रमाणीकरण पर जोर
खेत में आयोजित किसान बैठक में संयुक्त संचालक राठौर ने कहा कि लैलूंगा का जौफुल धान अपनी विशिष्ट सुगंध और पहचान के लिए प्रसिद्ध है। इसकी बाजार मांग और किसानों को मिलने वाली कीमत बढ़ाने के लिए एनपीओपी के तहत जैविक प्रमाणीकरण की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया, ताकि प्रमाणित जैविक उत्पाद के रूप में किसानों को बेहतर और प्रीमियम मूल्य मिल सके।
सन की खेती से बीज उत्पादन तक—किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद
अधिकारियों ने किसानों को सन के बीज उत्पादन कार्यक्रम की जानकारी भी दी। सन की खेती, बोनी की तकनीक और बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी कृषि प्रबंधन के बारे में किसानों को समझाया गया।
साथ ही किसानों को खेतों की मेड़ों पर हरी खाद के बीज लगाकर स्वयं बीज उत्पादन करने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि खेती की लागत कम करने के साथ किसान अपनी जरूरत का बीज स्वयं तैयार कर सकें और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें।
FPO के जरिए जौफुल का बढ़ेगा रकबा, सामूहिक विपणन से मिलेगा फायदा
संयुक्त संचालक ने किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से जौफुल धान का सामूहिक विपणन करने और इसके खेती क्षेत्र को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि किसान यदि संगठित होकर उत्पादन और विपणन करेंगे तो उन्हें बाजार तक बेहतर पहुंच और उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने में मदद मिल सकती है।
कृषि विभाग की ओर से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ विपणन सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया।
बारिश के बीच खेतों तक पहुंचकर अधिकारियों द्वारा किसानों से सीधे संवाद किए जाने को क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। भ्रमण के दौरान कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।







