रायगढ़ में एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित, संभावित मरीजों की शीघ्र पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित करने पर दिया गया जोर
रायगढ़, 28 अक्टूबर 2026। कुष्ठ रोग की समय पर पहचान और नियमित उपचार से बीमारी के कारण होने वाली दिव्यांगता के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, रायगढ़ के सभाकक्ष में स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों और ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में रोग के लक्षणों की पहचान, जांच, उपचार, बचाव और मरीजों की नियमित निगरानी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत और जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैकरा के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण में जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. अविनाश चंद्रा, सहयोगी कुष्ठ चिकित्सा सहायक श्री एम.पी. साहू एवं श्री दिनेश यादव ने स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया।
त्वचा पर दाग और सुन्नपन को न करें नजरअंदाज
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि त्वचा पर हल्के रंग के दाग-धब्बे, प्रभावित हिस्से में स्पर्श का एहसास कम होना या समाप्त हो जाना तथा नसों में सूजन अथवा मोटापन कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर संबंधित व्यक्ति की जांच कराकर समय पर उपचार शुरू करना आवश्यक है।
स्वास्थ्य कर्मियों को संभावित मरीजों की पहचान करने और उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी समझाई गई। इसके साथ ही मरीजों को नियमित रूप से दवा लेने के लिए प्रेरित करने, उपचार के दौरान उनकी स्थिति पर नजर रखने तथा बीमारी से संबंधित रिएक्शन होने पर आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि मरीजों की नियमित निगरानी से नसों को होने वाले नुकसान और उससे जुड़ी दिव्यांगता के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर
स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों और ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में कुष्ठ रोग के संभावित मामलों की शीघ्र पहचान करने तथा लोगों को समय पर जांच और उपचार के लिए जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। स्वास्थ्य कर्मियों से कहा गया कि वे आमजन को बीमारी के लक्षणों, उपचार की उपलब्धता और नियमित दवा सेवन के महत्व के बारे में जानकारी दें।
कार्यक्रम में कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और समय पर उपचार के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता भी बताई गई। नोडल अधिकारी डॉ. जावेद एवं स्वास्थ्य प्रशिक्षक श्री संदीप साहू भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
कुष्ठ रोग की शीघ्र पहचान, पूरा उपचार और नियमित निगरानी ही बीमारी से होने वाली गंभीर जटिलताओं को रोकने की दिशा में अहम कदम हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भूमिका से संभावित मरीजों तक समय पर उपचार पहुंचाने और दिव्यांगता के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।











