योजना की राशि बचाकर खरीदी नई मशीन, बैग और ब्लाउज सिलकर कर रहीं अच्छी कमाई; बच्चों के भविष्य के लिए भी कर रहीं बचत
रायगढ़, 28 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भरता की राह भी दिखा रही है। योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता का उपयोग कर महिलाएं न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि स्वरोजगार को आगे बढ़ाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी योगदान दे रही हैं। रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड के झलमला गांव की पद्मिनी यादव इसकी एक प्रेरक मिसाल हैं, जिन्होंने योजना की राशि बचाकर नई सिलाई मशीन खरीदी और अपने हुनर को कमाई का बेहतर जरिया बनाया।
हर महीने मिलने वाली राशि से खरीदी नई सिलाई मशीन
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक सहायता पद्मिनी यादव के लिए उपयोगी साबित हुई। वह पहले से सिलाई का काम करती थीं, लेकिन उनकी पुरानी मशीन खराब हो गई थी। इससे उन्हें बैग सिलने सहित अन्य काम करने में परेशानी हो रही थी।
ऐसे में पद्मिनी ने योजना के तहत मिलने वाली राशि को धीरे-धीरे जमा किया और नई सिलाई मशीन खरीद ली। नई मशीन मिलने के बाद उनके काम में तेजी आई और आमदनी बढ़ाने के नए अवसर भी मिले।
दुकानों के लिए बैग सिलकर कर रहीं कमाई
नई मशीन से पद्मिनी यादव अब बैग और ब्लाउज सिलने के साथ पुसौर क्षेत्र की विभिन्न दुकानों के लिए भी बैग तैयार कर रही हैं। उनके काम से फैंसी स्टोर, मिठाई की दुकानें, बेकरी और बीज की दुकानों को भी लाभ मिल रहा है। दुकानों से मिलने वाले सिलाई के काम के जरिए उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है।
इस कमाई से वह परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ अपने बच्चों के भविष्य के लिए भी बचत कर पा रही हैं। योजना से मिली आर्थिक सहायता को बचाकर किए गए छोटे से निवेश ने उनके पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद की है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
पद्मिनी यादव का कहना है कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार बचत करने और नई सिलाई मशीन खरीदने में मदद की। आज वह अपने हुनर के दम पर आय अर्जित कर रही हैं और परिवार को आर्थिक सहारा दे रही हैं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया है।
गौरतलब है कि महतारी वंदन योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार करना और परिवार में उनकी निर्णायक भूमिका को मजबूत करना है। योजना के तहत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।
पद्मिनी यादव की कहानी बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता का सही उपयोग महिलाओं के हुनर को रोजगार में बदलने का अवसर दे सकता है। बचत, मेहनत और आत्मविश्वास के सहारे वह न केवल आज परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव भी मजबूत कर रही हैं।











