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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग विभाग जमुना और चिंगारी का सामूदायिक वन संसाधान अधिकार का मूल्यांकन किया

लैलूंगा/कल दिनाँक07/05/2022 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग विभाग और तीर फाउंडेशन रायपुर टीम से 3 सदस्यों के एस ध्रुव, डॉक्टर गजेंद्र गुप्ता, योगेश अड़केने ने लैलूंगा ब्लॉक के दो गांवों जमुना और चिंगारी का सामूदायिक वन संसाधान अधिकार का मूल्यांकन और शोध अध्ययन करने उपस्थित थे। टीम के साथ जनपद सीईओ एस एस रात्रे, नायब तहसीलदार रॉकी एक्का, वन उप रेंजर , आदिवासी विभाग के प्रतिनिधि के तौर पे हॉस्टल से उमेश पटेल, मंडल संयोजक डी बायस भी थे और प्रदान संस्था से सुजाता एक्का, मितेंद्र और दिव्या भी उपस्थित रहे । ग्राम पंचायत जमुना के सरपंच श्रीमती शिववती पैंकरा और सचिव कुजूर और चिंगारी के भी पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समुदायिक वन संसाधन अधिकार समिति सदस्य, महिला स्व सहायता समुह के सदस्य और अन्य ग्राम वासी। इस दौरे में चर्चा के विषय रहे सीएफआरआर के दावा करने की प्रक्रिया, वन अधिकार कानून की समझ, अधिकार मिलने के बाद कार्य ,सामूदायिक वन संसाधान अधिकार समिती का संस्थागत मजबूती और कामकाज और राजस्व रिकॉर्ड में शीर्षक के अद्यतन को समझना था।जिसमे उनके द्वारा ग्राम को प्राप्त सामुदायिक वन संसाधन अधिकार , सामुदायिक अधिकार , व्यक्तिगत अधिकार पर चर्चा किया गया l चर्चा में आयोग द्वारा वन अधिकार दावा प्रक्रिया में गांव के द्वारा किए गए प्रक्रिया के बारे में वन अधिकार समिति , सरपंच एवं ग्रामवासी से पूछा गया , समिति के द्वारा दावा प्रक्रिया को बताया गया l वन संसाधन अधिकार पत्र प्राप्त करने के बाद , वन संधान प्रबंधन समिति बनाने की प्रक्रिया , प्रदान के साथ मिलके गांव द्वारा किए गए वन अधिकार पत्र के सीमांकन, वन प्रबंधन हेतु बनाए नियम, संवर्धन हेतु वृक्षा रोपण प्लान को एवं जल संरक्षण को लेकर किए गए कार्य योजना , क्षेत्र भ्रमण , नरेगा कार्य अभिसरण पर चर्चा किया गयाl। जिसमे वहां के ग्राम की मुख्य समस्याओं और उनके निराकरण को लेकर भी चर्चा किया गया। प्रदान द्वारा दिया गया सहयोग के बारे में बात किया गया।
इन गांवों में अधिकार मिलने के पश्चात प्रदान संस्था के सहयोग से प्रबंधन योजना, आंतरिक और आजीविका हस्तक्षेप की प्रक्रिया को सुगम बनाया है। सीएफआरएमसी के सदस्यों ने सीमा मानचित्रण, वन के लिए मानदंड स्थापित करने, आंतरिक योजना और वन पैच योजना की अपनी यात्रा को साझा किया।

ग्रामीणों ने आयोग सदस्य के सामने जेएफएमसी की योजना और पारदर्शिता की प्रक्रिया की मांग की और वन विभाग के साथ समन्वय में अपनी चुनौतियों को साझा किया।

आयोग की टीम ने सीएफआरएमसी को मजबूत करने, राजस्व रिकॉर्ड में शीर्षक अद्यतन, ठोस ग्राम योजना के लिए वन और राजस्व विभाग के साथ सहयोग करने में प्रदान की सकारात्मक भागीदारी के निम्नलिखित हस्तक्षेपों की गुंजाइश खोली है और इसके प्रति सभी विभाग को संगठित काम करने के लिए सुझाव दिया।

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