

बाल शोध मेला में दिखी बच्चों की प्रतिभा, शोध कर कई विषयों की जानकारी इकट्ठा की

- बच्चों ने गाँव के इतिहास की खोज की, तो बाल अधिकार को भी रेखांकित किया
- अब तक तीन स्कूलों में हो चुका बाल शोध मेला
लैलूँगा। माध्यमिक शाला खम्हार ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से सामाजिक विज्ञान के तहत ‘बाल शोध मेला’ का आयोजन स्कूल परिसर में किया। इस आयोजन में प्राथमिक शाला खम्हार के बच्चे भी शामिल रहें। इसके आयोजन की तैयारी करीब महीने भर से चलती रही। बाल शोध मेला में बच्चों ने इतिहास, भूगोल और नागरिकशास्त्र के कई बिंदुओं जानकारी इकट्ठा कर उसकी प्रस्तुतीकरण किए। बच्चों ने गाँव का इतिहास, आदर्श पर्यावरण, बजट, पर्वत, पठार, मैदान, जनजातियों की संस्कृति, सिंधु घाटी सभ्यता, समाज में महिलाओं की भूमिका, भूमि उपयोग, बच्चों का अधिकार विषय पर समूहों में बटकर समुदाय से जानकारी एकत्रित कर अपनी समझ को बनाएं। बच्चों ने विभिन्न विषयों के संदर्भ में समय के साथ होने वाले बदलाव को भी रेखांकित किया और इतिहास को समझने का प्रयास किया तो वहीं नागरिक शास्त्र से अधिकार और कर्तव्यों को भी समझा। कार्यक्रम को देखने के लिए शिक्षक और हाई स्कूल खम्हार के बच्चे भी शामिल रहें। शोध की इस पूरी प्रक्रिया में बच्चे बुनियादी साक्षरता और गणितीय ज्ञान की प्राप्ति की दिशा में कार्यरत थे। शोध की पूरी प्रक्रिया प्रधान पाठक सुशीला ओराव, शिक्षिका मीना भगत और शिक्षक देव कुमार यादव, विजय कुमार चौधरी के नेतृत्व में पूरा हुआ। इस अवसर पर मौजूद संकुल प्राचार्य मंगल कुराल ने कहा कि शोध प्रक्रिया से बच्चों को किसी विषय की जानकारी देना काफी रोचक है। इससे बच्चों को करके सीखने का अवसर मिलता है। प्रभारी बीईओ शेखर राजपूत और बीआरसीसी अरविन्द राजपूत ने भी इस आयोजन की प्रशंसा की है। इसके पूर्व में माध्यमिक शाला बरखोरिया, माध्यमिक शाला नवीन कुंजारा में भी बच्चों ने बाल शोध मेला का आयोजन किया था।







