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लैलूँगा ~ लिक्विड गैस टैंकर हादसे से फैली जहरीली गैस, जनपद उपाध्यक्ष मनोज सुखन ने धरना देकर उठाई आवाज, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

लिक्विड गैस टैंकर हादसे से फैली जहरीली गैस, जनपद उपाध्यक्ष मनोज सुखन ने धरना देकर उठाई आवाज, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

रिपोर्ट ~ हीरालाल राठिया लैलूंगा


लैलूंगा (रेगड़ी) | मंगलवार की रात्रि ग्राम पंचायत रेगड़ी में एक गंभीर हादसे ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। एक अज्ञात मोटरसाइकिल सवार ने चलती हुई लिक्विड गैस टैंकर को टक्कर मार दी, जिससे टैंकर से जहरीली गैस का रिसाव शुरू हो गया। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। रिसाव के कारण आसपास के वातावरण में विषाक्तता फैलने लगी, जिससे इंसान, पशु-पक्षी और पर्यावरण सभी पर खतरा मंडराने लगा।

इस गंभीर स्थिति के विरोध में बुधवार सुबह 6 बजे जनपद उपाध्यक्ष मनोज सुखन के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। धरना स्थल पर हजारों ग्रामीण इकट्ठा हो गए। जनप्रतिनिधियों की भी बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। धरना में नूतन प्रधान, जनपद सदस्य प्रतिनिधि प्रेम चौहान, ग्राम पटेल राम सिंग सिदार, सरपंच पति हेम सिंग राठिया, पंच धनीराम राठिया सहित कई स्थानीय नेता एवं नागरिक भाग ले रहे हैं। सभी की मांग है कि इस दुर्घटना की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

जनपद उपाध्यक्ष मनोज सुखन ने मीडिया से बातचीत में कहा,

यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है। अगर समय रहते गैस रिसाव पर काबू नहीं पाया जाता, तो एक बड़ी जनहानि हो सकती थी। हम यहां सिर्फ विरोध नहीं कर रहे, बल्कि पूरे गांव की सुरक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं।”



उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना की सूचना तुरंत पुलिस और प्रशासन को दी गई थी, लेकिन समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। मौके पर हजारों गाड़ियों की आवाजाही बंद हो गई है और लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

गैस रिसाव से जल जीवन प्रभावित

गांव के लोगों ने बताया कि टैंकर से हाइड्रोक्लोरिक एसिड (Hydrochloric Acid) का रिसाव हुआ, जिससे स्थानीय जल स्रोत प्रदूषित हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद इलाके का जल जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। नलों से निकलने वाले पानी में तेज बदबू आने लगी है और कई जगहों पर पानी का रंग भी बदल गया है। इससे लोगों को पीने योग्य पानी तक मयस्सर नहीं हो रहा।

पशुपालकों ने बताया कि हादसे के बाद कई मवेशियों की तबीयत खराब हो गई है। वहीं ग्रामीणों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और त्वचा पर चकत्ते जैसी शिकायतें हो रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर खास चिंता जताई जा रही है।

धरने में उठीं ये प्रमुख मांगें

धरना स्थल पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मांगे रखीं:

1. घटना की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।


2. हाइड्रोक्लोरिक एसिड टैंकरों के परिवहन में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।


3. गैस रिसाव से प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य की जांच हेतु मेडिकल कैम्प लगाया जाए।


4. प्रदूषित जल स्रोतों की सफाई कर स्वच्छ जल की तत्काल व्यवस्था की जाए।


5. प्रभावित क्षेत्र को तत्काल ‘खतरे का क्षेत्र’ घोषित कर आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं।


6. पीड़ित ग्रामीणों को उचित मुआवजा दिया जाए।



प्रशासन की चुप्पी बनी चिंता का विषय

हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मौके पर अभी तक न तो स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची है और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और भय का माहौल बना हुआ है।

आंदोलन की चेतावनी

जनपद उपाध्यक्ष मनोज सुखन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेता और उचित कार्रवाई नहीं करता, तो आंदोलन को जिला मुख्यालय तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल रेगड़ी गांव का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है।

निष्कर्ष

रेगड़ी गांव में हुए इस हादसे ने यह साबित कर दिया है कि खतरनाक रसायनों के परिवहन को लेकर हमारी व्यवस्था में अब भी गंभीर खामियां हैं। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो भविष्य में इससे भी बड़े हादसे हो सकते हैं। अब यह प्रशासन पर निर्भर है कि वह लोगों की चिंता को कितनी गंभीरता से लेता है और कितनी जल्दी उचित कदम उठाता है।

ग्रामीणों का यह शांतिपूर्ण धरना एक चेतावनी है—सिर्फ इस हादसे के लिए नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करने के लिए। यह देखना बाकी है कि इस जनआंदोलन से प्रशासन की नींद खुलती है या नहीं।

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