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खेतों में अब फसल नहीं, बोतलें उग रहीं हैं – कुंजारा बना ‘शराबग्राम’, ग्रामीण बोले: अगला आंदोलन बोतलों के खिलाफ!”

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खेतों में अब फसल नहीं, बोतलें उग रहीं हैं – कुंजारा बना ‘शराबग्राम’, ग्रामीण बोले: अगला आंदोलन बोतलों के खिलाफ!”

लैलूंगा/कुंजारा। जहां कभी खेतों में धान की बालियाँ लहलहाती थीं, वहां अब शराबियों की टोलियाँ लुढ़कती मिलती हैं। लैलूंगा से सटे ग्राम पंचायत कुंजारा का उद्यान मार्ग अब न हरियाली के लिए जाना जाता है, न ताजगी के लिए – अब इसे लोग ‘शराब गली’, ‘नशा पर्यटन स्थल’ और ‘बोतल पथ’ जैसे नामों से पुकारने लगे हैं।

जैसे ही पास की शराब दुकान खुलती है, पूरा क्षेत्र ‘ओपन बार’ में तब्दील हो जाता है। सरकारी जमीन, वीरान भवन और किसानों के खेत अब ‘दारूबाजों की पार्टी पॉइंट’ बन चुके हैं।

बोतलों से सजी ‘शराब प्रदर्शनी’:
कभी खेतों में फसल काटी जाती थी, अब वहां बोतलों की ‘फसल’ काटी जा रही है। प्लास्टिक के गिलास, हड्डियों के ढेर और टूटे कांचों से खेत ऐसे लगते हैं मानो कोई आधुनिक कला संग्रहालय बन गए हों। किसान कहते हैं – “खेती करने से पहले अब ट्रैक्टर नहीं, JCB बुलवाते हैं – ताकि बोतल और हड्डियों की सफाई हो सके।”

महिलाएं डर के साए में, बुजुर्ग घरों में कैद:
जहां कभी लोग नंगे पाँव घूमते थे, वहां अब चप्पल पहन कर भी चलना खतरे से खाली नहीं। कोई नशे में झाड़ियों में लोट रहा है, कोई खेत की मेड पर उल्टी कर रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों का मार्ग पर चलना तक मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों की दो टूक: या अहाता दो, या दुकान हटाओ!
गांव वालों ने स्पष्ट कहा है –

1. या तो एक नियंत्रित अहाते की व्यवस्था की जाए।


2. या फिर शराब दुकान को उठाकर जंगल के किसी कोने में विस्थापित कर दिया जाए।



‘शराब से नहीं, शराबियों से लड़ेगा कुंजारा!’
गांव के युवाओं ने अब मोर्चा संभाल लिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिन में समाधान नहीं हुआ, तो कुंजारा में ‘दूसरा चंपारण आंदोलन’ शुरू किया जाएगा – इस बार शराब के नहीं, बल्कि शराबियों की अराजकता के खिलाफ।

नारा भी तैयार है –
“आओ कुंजारा, पीओ खुल के – लेकिन बोतल खेत में मत फेंको!”

प्रशासन मौन, पुलिस गायब:
सब कुछ खुलेआम हो रहा है, लेकिन प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। न कोई पुलिस गश्त, न कोई कार्रवाई। ग्रामीणों की गुहार अनसुनी हो रही है और शराबियों की हिम्मतें बढ़ती जा रही हैं।

अब सवाल सिर्फ इतना है – क्या कुंजारा फिर से खुशबूदार खेतों वाला गांव बनेगा या बोतलों का कब्रिस्तान बनकर रह जाएगा?

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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