अमित शाह के ‘वनवासी’ शब्द पर कांग्रेस पार्षद योजना पैकरा की आपत्ति, कहा— आदिवासी समाज की भावनाएं आहत
आदिवासी पहचान के सवाल पर मुखर हुईं योजना पैंकरा , गृह मंत्री के संबोधन पर जताई कड़ी नाराज़गी
‘आदिवासी सम्मान से समझौता नहीं’— अमित शाह के ‘वनवासी’ संबोधन पर कांग्रेस पार्षद का पलटवार
गृह मंत्री के ‘वनवासी’ संबोधन पर गरमाई सियासत, कांग्रेस पार्षद योजना पैकरा ने उठाई आवाज
“आदिवासी सिर्फ जंगल में रहने वाला समुदाय नहीं है, आदिवासी इस देश की मूल संस्कृति, परंपरा और पहचान के संवाहक हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज के लिए ‘वनवासी’ शब्द का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है। यह शब्द आदिवासी समाज के ऐतिहासिक अस्तित्व, उनकी पहचान और उनके संवैधानिक अधिकारों को कमतर आंकने का प्रयास प्रतीत होता है।
मैं, नगर पंचायत लैलूँगा वार्ड क्रमांक 6 की कांग्रेस पार्षद श्रीमती योजना शिवशंकर पैंकरा , इस बयान पर कड़ी आपत्ति करती हूं। आदिवासी समाज को संविधान ने ‘अनुसूचित जनजाति’ और देश ने ‘आदिवासी’ के रूप में सम्मान दिया है। ऐसे में देश के इतने बड़े पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ‘वनवासी’ जैसे शब्द का प्रयोग करोड़ों आदिवासियों की भावनाओं को आहत करता है।
आदिवासी समाज ने हमेशा जल, जंगल और जमीन की रक्षा की है, देश की आजादी से लेकर राष्ट्र निर्माण तक अपना अमूल्य योगदान दिया है। उनकी पहचान को बदलने या कमजोर करने की किसी भी कोशिश को समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
मैं केंद्र सरकार से मांग करती हूं कि आदिवासी समुदाय के सम्मान और गरिमा का ध्यान रखते हुए भविष्य में ऐसी शब्दावली के प्रयोग से बचा जाए और आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ बात की जाए।
आदिवासी सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा। हमारी पहचान, हमारा स्वाभिमान और हमारे अधिकार सर्वोपरि हैं।
जय जोहार! जय आदिवासी समाज!”
समापन नारा: “जो आदिवासी का सम्मान करेगा, वही देश का सम्मान करेगा!” “पहचान पर चोट नहीं सहेंगे, आदिवासी सम्मान लेकर रहेंगे!” “जल-जंगल-जमीन और स्वाभिमान, यही है आदिवासी की पहचान!”








