पत्रकार हीरालाल राठिया लैलूंगा, रायगढ़

जिले में 23 हजार मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों की उपलब्धता, 7 हजार 582 मीट्रिक टन का हुआ वितरण
रायगढ़, 9 जून 2026/ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा की बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को राज्य शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास, हाउस होल्ड सर्वे की तैयारियों, खरीफ सीजन की तैयारियों तथा किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि राज्य शासन द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से विशेष प्रकोष्ठों के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया है। इसके तहत पूर्व में गठित विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर विकास प्रकोष्ठ के क्षेत्राधिकार का पुनर्परिसीमन करते हुए विशेष रूप से कमजोर जनजाति बिरहोर एवं पहाड़ी कोरवा विकास प्रकोष्ठ, धरमजयगढ़ का पुनर्गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि परियोजना प्रशासक, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना धरमजयगढ़ को प्रकोष्ठ का प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। पुनर्गठित प्रकोष्ठ के अंतर्गत बिरहोर जनजाति के 26 ग्रामों के 253 परिवार तथा पहाड़ी कोरवा जनजाति के 56 ग्रामों के 799 परिवार शामिल किए गए हैं। इस प्रकार कुल 82 ग्रामों के 1052 परिवारों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और विकास कार्यक्रमों से लाभान्वित करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
सहायक आयुक्त ने बताया कि भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा पीवीटीजी हाउसहोल्ड डाटा कैप्चर एवं पीवीटीजी एंटाइटलमेंट कार्ड सर्वेक्षण के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत जिला, अनुविभाग एवं ग्राम पंचायत स्तर पर समितियों एवं सर्वेक्षण दलों का गठन किया जा रहा है। ग्राम स्तरीय सर्वेक्षण दलों का प्रशिक्षण 15 एवं 16 जून को आयोजित किया जाएगा तथा 17 जून से 3 जुलाई 2026 तक मोबाइल एप के माध्यम से परिवार सर्वेक्षण का कार्य किया जाएगा। इसके उपरांत सर्वे प्रपत्रों का परीक्षण एवं अनुमोदन की कार्यवाही निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण की जाएगी। उन्होंने बताया कि इन विशेष रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आजीविका, कौशल विकास, आवास, पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए विभागीय समन्वय के साथ कार्य किया जाएगा। शासन की मंशानुरूप पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए मैदानी स्तर पर सर्वेक्षण एवं आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ की जा रही है।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने खरीफ सीजन की तैयारियों एवं जिले में उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। कलेक्टर ने जिले में उर्वरकों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि खरीफ सीजन के दौरान जिले के किसी भी क्षेत्र में उर्वरकों की कमी की स्थिति निर्मित न हो। उन्होंने विकासखंडवार उपलब्धता एवं वितरण की नियमित निगरानी करने, समितियों में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने तथा किसानों को सुगमता एवं पारदर्शिता के साथ उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि कार्यों के लिए किसानों को आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। राज्य शासन द्वारा जिले के लिए खरीफ 2026 के लिए विभिन्न प्रकार के उर्वरकों का पर्याप्त आबंटन किया गया है तथा किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लगातार भंडारण एवं वितरण की व्यवस्था की जाए।
कृषि उप संचालक ने बैठक में बताया कि वर्तमान में जिला सहकारी बैंक के डबल लॉक केंद्रों में 4 हजार 543 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण उपलब्ध है। वहीं प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में 11 हजार 81 मीट्रिक टन उर्वरक सुरक्षित रखे गए हैं। इस प्रकार जिले में कुल 15 हजार 624 मीट्रिक टन उर्वरकों का उपलब्ध स्टॉक किसानों की जरूरतों की पूर्ति के लिए उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन के दौरान अब तक किसानों को 7 हजार 582 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके, पोटाश एवं एसएसपी सहित विभिन्न प्रकार के उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। डबल लॉक केंद्रों एवं समितियों में उपलब्ध भंडारण तथा अब तक किए गए वितरण को मिलाकर जिले में कुल 23 हजार 206 मीट्रिक टन उर्वरकों की उपलब्धता दर्ज की गई है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 71.62 प्रतिशत है।
बैठक में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने विद्युत विभाग को विशेष रूप से कमजोर जनजाति पहाड़ी कोरवा बाहुल्य किसी एक विद्युतविहीन ग्राम का चयन कर उसे शत-प्रतिशत विद्युतीकृत करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के शीघ्र संचालन को देखते हुए उन्होंने सभी विभागों को तकनीकी एवं प्रशासनिक तैयारियां पूर्ण रखने तथा शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए अलर्ट मोड में रहने को कहा। कलेक्टर ने जनदर्शन में प्राप्त लंबित आवेदनों की समीक्षा करते हुए उनके शीघ्र निराकरण एवं आदि सेवा केंद्र पोर्टल में नियमित अद्यतन की आवश्यकता पर जोर दिया। बाल नीति-2022 की समीक्षा के दौरान उन्होंने सड़क जैसी परिस्थितियों में जीवन-यापन करने वाले, भिक्षावृत्ति में संलग्न एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की समीक्षा में कलेक्टर ने पूर्ण हो चुकी योजनाओं के सफल संचालन एवं सामुदायिक सहभागिता के उत्कृष्ट उदाहरणों का दस्तावेजीकरण कर वीडियो तैयार करने तथा निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करने को कहा। वहीं महतारी वंदन योजना के तहत सभी हितग्राहियों के बैंक खातों की शत-प्रतिशत ई-केवाईसी सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए शेष प्रकरणों की विभागवार समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मांग, शिकायत एवं समस्याओं से जुड़े प्रत्येक आवेदन का संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े लंबित वसूली प्रकरणों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। कलेक्टर ने कहा कि शासन की प्राथमिकताओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और सभी विभाग निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित करें। बैठक में एडीएम अपूर्व प्रियेश टोप्पो, अपर कलेक्टर रवि राही, डॉ.प्रियका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर पूजा बंसल सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।







