रायगढ 11 जून। जिले के लैलूंगा विकासखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना की रफ्तार थमती हुई नजर आ रही है। कई हितग्राहियों के घर अधूरे पड़े हैं, जबकि योजना का लाभ मिलने का इंतजार कर रहे लोगों में निराशा बढ़ती जा रही है। सवाल यह है कि आखिर योजना के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं के लिए जिम्मेदार कौन है? देखिए हमारी विशेष
केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। लेकिन रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड में इस योजना की जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। कई गांवों में आवास निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, तो कहीं निर्माण शुरू ही नहीं हो पाया है।
हितग्राहियों का कहना है कि किस्तों के भुगतान में देरी, तकनीकी समस्याएं और अधिकारियों की उदासीनता के कारण उनका सपना अधूरा रह गया है। कुछ परिवार आज भी कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि उनके नाम योजना की सूची में शामिल हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या संबंधित विभाग योजना के प्रति गंभीर है या फिर प्रशासनिक लापरवाही के चलते गरीबों का आशियाना अधर में लटका हुआ है।
वहीं जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि लंबित मामलों की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही निर्माण कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति में सुधार कब तक होगा, यह अभी बड़ा सवाल बना हुआ है।








