
संपादक : चंद्रशेखर जायसवाल | Cglive24.co.in
लैलूंगा। लैलूंगा क्षेत्र में इन दिनों अवैध उत्खनन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। बिना किसी वैध अनुमति और रॉयल्टी के जेसीबी मशीनों एवं ट्रैक्टरों के माध्यम से भारी मात्रा में मिट्टी और मुरुम का उत्खनन किया जा रहा है। दिन-रात चल रहे इस खेल से शासन को राजस्व की भारी क्षति हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर खुदाई की जा रही है। जेसीबी मशीनें लगातार धरती का सीना चीर रही हैं और ट्रैक्टरों के जरिए अवैध खनिज सामग्री का परिवहन भी किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ खुलेआम होने के बावजूद राजस्व विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लगाई गई तो पर्यावरणीय नुकसान के साथ-साथ भविष्य में गंभीर भू-क्षरण और जल संकट जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
बड़े सवाल
आखिर बिना अनुमति के चल रहे उत्खनन पर कार्रवाई क्यों नहीं?
जेसीबी और ट्रैक्टरों की आवाजाही से प्रशासन अनजान कैसे?
क्या अवैध उत्खनन माफियाओं को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
शासन को हो रहे लाखों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
क्षेत्र में बढ़ते अवैध उत्खनन को लेकर अब लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जनता का सवाल — आखिर कब जागेगा राजस्व विभाग?
लैलूंगा की धरती को खोखला करने वाले अवैध उत्खनन माफियाओं पर कब शिकंजा कसेगा प्रशासन, यह बड़ा सवाल बन गया है। फिलहाल माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और जिम्मेदार विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।









