WhatsApp Image 2026-08-08 at 19.47.36
WhatsApp Image 2026-08-08 at 19.47.37 (1)
WhatsApp Image 2026-08-08 at 19.47.37 (2)

धान छोड़ रागी अपनाई, अब समृद्धि की नई फसल काट रहे लैलूँगा के आदिवासी किसान

WhatsApp Image 2026-08-09 at 17.42.03
WhatsApp Image 2026-08-09 at 17.42.04
WhatsApp Image 2026-08-08 at 19.47.37

पत्रकार हीरालाल राठिया लैलूंगा रायगढ़


डीएमएफ के सहयोग और कृषि विभाग के मार्गदर्शन से ग्रीष्मकालीन रागी उत्पादन बना आय बढ़ाने का नया मॉडल

गोसाई राम राठिया के नेतृत्व में किसानों ने 45 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले रागी बीज की पहली खेप बीज निगम को बेची

रायगढ़ 26 जून 2026// बदलाव की शुरुआत अक्सर एक छोटे कदम से होती है। लैलूंगा विकासखंड के वनांचल ग्राम फुठामुड़ा में यही बदलाव आज किसानों की नई पहचान बन चुका है। कभी ग्रीष्मकाल में अधिक पानी और अधिक लागत वाली धान की खेती करने वाले यहां के आदिवासी किसानों ने अब रागी (मड़ुआ) की खेती अपनाकर न केवल अपनी आय का नया रास्ता खोला है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।
       इस परिवर्तन की अगुवाई प्रगतिशील किसान गोसाई राम राठिया ने की। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) के सहयोग से उन्होंने गांव के किसानों को संगठित किया और ग्रीष्मकाल में धान के स्थान पर कम पानी में तैयार होने वाली पोषक फसल रागी की सामुदायिक खेती शुरू कराई। वैज्ञानिक पद्धति, सामूहिक मेहनत और विभागीय सहयोग का परिणाम यह रहा कि पहली ही फसल में किसानों को उत्कृष्ट गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त हुआ। बेहतर बाजार और उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए किसानों ने छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के बीज उत्पादन कार्यक्रम में पंजीयन कराया। घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त रागी सुरक्षित रखने के बाद किसानों ने 45 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले रागी बीज की पहली खेप निगम को विक्रय की। यह उपलब्धि न केवल किसानों की अतिरिक्त आय का माध्यम बनी, बल्कि फुठामुड़ा को रागी बीज उत्पादन के उभरते केंद्र के रूप में नई पहचान भी दिला रही है।
       आज गोसाई राम राठिया की पहल से गांव के अनेक किसान रागी उत्पादन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कम पानी, कम लागत और बेहतर लाभ देने वाली यह खेती प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही है। पोषण से भरपूर मोटे अनाज को बढ़ावा देने की दिशा में यह प्रयास शासन की मंशा को भी साकार कर रहा है। फुठामुड़ा की यह सफलता बताती है कि जब किसानों को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और योजनाओं का लाभ समय पर मिले, तो खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि का मजबूत आधार बन जाती है। लैलूंगा के आदिवासी किसानों की यह कहानी आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा और कृषि नवाचार की नई मिसाल है।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
spot_img
spot_img

Recent Posts

National Sports Awards 2025: 17 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड, खेल मंत्रालय ने जारी की सूची

नई दिल्ली। भारत सरकार ने नेशनल स्पोर्ट्स अवॉर्ड 2025 के तहत अर्जुन अवॉर्ड के लिए 17 खिलाड़ियों के नामों का ऐलान किया है। एथलेटिक्स,...

CHHATTISGARH NEWS

National Sports Awards 2025: 17 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड, खेल मंत्रालय ने जारी की सूची

नई दिल्ली। भारत सरकार ने नेशनल स्पोर्ट्स अवॉर्ड 2025 के तहत अर्जुन अवॉर्ड के लिए 17 खिलाड़ियों के नामों का ऐलान किया है। एथलेटिक्स,...

RAIGARH NEWS

गेरवानी शराब दुकान में पिस्टलनुमा हथियार से फायरिंग, प्राइवेट गार्ड के पेट में लगी गोली

रायगढ़। जिले के पूंजीपथरा थाना क्षेत्र के गेरवानी स्थित शासकीय देशी कम्पोजिट मदिरा दुकान में 17 अगस्त 2026 की रात पिस्टलनुमा हथियार से फायरिंग...