लकड़ी के बहिंगा और पत्थर से सिर पर किया वार, दोनों आरोपी गिरफ्तार; सन्ना थाना क्षेत्र का मामला

जशपुर। सन्ना थाना क्षेत्र के ग्राम कंदराई पाठ में मृत बछड़े को दफनाने के बदले मिले रुपए में हिस्से को लेकर हुए विवाद में पिता-पुत्र ने अपने ही गांव के एक व्यक्ति के सिर पर लकड़ी के बहिंगा और पत्थर से हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने के बाद युवक की मौत हो गई। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
रुपए में हिस्से की मांग को लेकर हुआ विवाद
पुलिस के अनुसार 10 अगस्त 2026 को ग्राम कंदराई पाठ निवासी अघनू राम कोरवा ने सन्ना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी फगुआ राम कोरवा और उसका बेटा बृजनाथ राम कोरवा लकड़ी बेचने सन्ना आए थे। इसी दौरान गांव के एक व्यक्ति ने अपने मृत बछड़े को दफनाने के लिए दोनों से कहा। बछड़े को दफनाने के बाद उन्हें इसके बदले रुपए मिले।
बाद में पंचायत भवन सन्ना के पास आरोपियों की मुलाकात मृतक फगुआ राम से हुई। मृतक ने बछड़े को दफनाने के बदले मिले रुपए में अपना हिस्सा मांगा। इसी बात को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि दोनों ने लकड़ी के बहिंगा और पास पड़े पत्थर से फगुआ राम के सिर पर वार कर दिया।
इलाज के दौरान रास्ते में हुई मौत
हमले में फगुआ राम गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया। उसे एंबुलेंस से इलाज के लिए जशपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
दोनों आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम कराया। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में सिर में लगी चोट के कारण मृत्यु की प्रकृति हत्यात्मक बताए जाने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया।
पूछताछ में आरोपियों द्वारा अपराध स्वीकार करने तथा पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर फगुआ राम कोरवा (50) और बृजनाथ राम कोरवा (21), दोनों निवासी कंदराई पाठ, थाना सन्ना, को विधिवत गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त लकड़ी का बहिंगा और पत्थर भी जब्त किया है।
धारा 103(1) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज
मृतक के भाई की रिपोर्ट पर थाना सन्ना में बीएनएस की धारा 103(1) के तहत हत्या का अपराध दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है।
पुलिस टीम की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्रवाई में थाना प्रभारी सन्ना उप निरीक्षक सीरद साय पैंकरा, प्रधान आरक्षक रविंद्र एक्का, आरक्षक मनोज जांगड़े, सुरेश टोप्पो और संतोष प्रजापति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।





