तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर नौनिहाल, फर्जी हाजिरी और मीनू में गड़बड़ी के आरोप; अभिभावकों ने मांगी जांच
तमता/पत्थलगांव (जशपुर)। ग्राम पंचायत तमता स्थित शासकीय प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास में कथित अव्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। छात्रावास में रह रहे बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जर्जर भवन और तिरपाल के सहारे छत
बताया जा रहा है कि छात्रावास भवन की स्थिति जर्जर है। बारिश के पानी से बचाव के लिए छत पर तिरपाल लगाई गई है। ऐसे में छात्रावास में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। वहीं शौचालयों में गंदगी और सेप्टिक टैंक के ओवरफ्लो होने की शिकायत भी सामने आई है। इससे दुर्गंध के साथ संक्रमण का खतरा होने की आशंका बनी हुई है।
50 सीटर छात्रावास में उपस्थिति को लेकर सवाल
छात्रावास की क्षमता करीब 50 विद्यार्थियों की बताई जा रही है, लेकिन आरोप है कि मौके पर अक्सर 30 से 35 बच्चे ही दिखाई देते हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि उपस्थिति रजिस्टर में वास्तविक संख्या से अधिक विद्यार्थियों की हाजिरी दर्ज की जाती है। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
गैस की जगह चूल्हे पर भोजन पकाने का आरोप
छात्रावास में भोजन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि गैस सिलेंडर के स्थान पर चूल्हे पर भोजन तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा शासन द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन और नाश्ता उपलब्ध नहीं कराए जाने की शिकायत भी सामने आई है।
व्यवस्था पर उठ रहे सवाल, जांच की मांग
मुख्यमंत्री के गृह जिले में संचालित छात्रावास में कथित अव्यवस्थाओं की शिकायत सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। अभिभावकों और ग्रामीणों ने छात्रावास में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, उपस्थिति रजिस्टर, भोजन व्यवस्था, निर्धारित मीनू, भवन की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
जांच में आरोप सही मिले तो कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच के दौरान अनियमितता या लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह मामले का संज्ञान लेकर कब तक जांच और सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाता है।






