8 वर्षीय आशिका की कथक प्रस्तुति बनी सांस्कृतिक संध्या का आकर्षण, भाव-भंगिमाओं और लय-ताल के सुंदर समन्वय ने जीता दर्शकों का दिल
रायगढ़, 22 सितंबर 2026। 41वें चक्रधर समारोह में 8 वर्षीय बाल नृत्यांगना आशिका सिंघल की कथक प्रस्तुति सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण रही। आशिका ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत ‘जय-जय जगतजननी देवी…’ स्तुति से की और इसके बाद कथक की विभिन्न विधाओं के माध्यम से मंच पर अपनी कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

कथक की विविध प्रस्तुतियों से बांधा समां
आशिका ने कथक के तोड़ा, 50 चक्कर, टुकड़ा, आमद और तत्कार की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। उनकी प्रस्तुति में लय और ताल का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और खूब वाहवाही बटोरी।

श्रीकृष्ण-राधा के होली-रास ने बढ़ाई प्रस्तुति की खूबसूरती
प्रस्तुति के अगले चरण में आशिका ने श्रीकृष्ण और राधा-रानी के होली-रास पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। भाव-भंगिमाओं, लय और ताल के सुंदर मेल ने कथक की प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया।
चार वर्ष की उम्र से कर रहीं कथक की साधना
राजकुमार कॉलेज, रायपुर की कक्षा तीसरी की छात्रा आशिका ने महज 4 वर्ष की आयु से कथक प्रशिक्षण प्रारंभ किया है। वे अपनी गुरु सुश्री नेहा सिंह के मार्गदर्शन में कथक की साधना कर रही हैं।
प्रतिष्ठित मंचों पर दे चुकी हैं प्रस्तुति
आशिका पावस प्रसंग, राज्योत्सव और 40वें चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर भी अपनी कथक प्रस्तुति दे चुकी हैं। 41वें चक्रधर समारोह में उनकी प्रस्तुति ने एक बार फिर उनकी नृत्य प्रतिभा और कला साधना की झलक दर्शकों के सामने रखी।






