ओडिसी, भरतनाट्यम और कथक की मनोहारी प्रस्तुतियों ने सप्तम सांस्कृतिक संध्या में बांधा समां
रायगढ़, 20 सितंबर 2026। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सप्तम सांस्कृतिक संध्या में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के नृत्य संकाय के विद्यार्थियों ने ओडिसी, भरतनाट्यम और कथक की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। भाव, लय और ताल के सुंदर समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया और मंच शास्त्रीय नृत्य के विविध रंगों से सजा नजर आया।

गणेश वंदना से हुई सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत ओडिसी नृत्य विभाग के विद्यार्थियों ने ‘गणेश वंदना’ से की। ‘एकदन्तो लम्बोदरो विघ्नविनाशको देवः’ की भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से जया निर्मलकर, सुधा योजन, प्रज्ञा प्रसाद, मीरा वर्मा, दुर्गा प्रसाद, लीना धनकर और रिकी टुडू ने भगवान गणेश की आराधना को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया।

इस प्रस्तुति का नृत्य निर्देशन श्री सुशांत कुमार दास ने किया।
भरतनाट्यम की ‘नृत्यांजलि’ ने मोहा दर्शकों का मन
इसके बाद भरतनाट्यम नृत्य विभाग के विद्यार्थियों ने ‘नृत्यांजलि’ की प्रस्तुति दी। लावण्या आनंद द्वारा रचित इस प्रस्तुति का नृत्य संयोजन डॉ. मेदिनी होम्बल एवं श्री होरिल गौर ने किया।

प्रस्तुति में होरिल गौर, प्रीति चौधरी, खुशबू भुमिज, अनुकृति सिंह, अवनि जैन, अदिति शर्मा, अंजलि चौहान और यामिनी निषाद ने भाग लिया।
‘भारत के रंग’ में दिखा शास्त्रीय नृत्य का संगम
समारोह की प्रस्तुतियों में ‘भारत के रंग’ ने विशेष आकर्षण पैदा किया। भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से ‘वंदे मातरम्’ की भावभूमि को मंच पर जीवंत किया गया।

इस प्रस्तुति का नृत्य निर्देशन श्री सुशांत कुमार दास तथा सह-निर्देशन श्री होरिल गौर ने किया।
शिव वंदना से हुआ शास्त्रीय प्रस्तुति क्रम का विस्तार

इसके पश्चात कथक विभाग के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने स्व. पं. बिरजू महाराज द्वारा राग हंसध्वनि और तीनताल में रचित ‘निरतत शंकर पार्वती संग’ पर आधारित शिव वंदना प्रस्तुत की। शास्त्रीय नृत्य की इन प्रस्तुतियों ने चक्रधर समारोह की सप्तम सांस्कृतिक संध्या को विविध रंगों से समृद्ध किया।







