पुसौर के वर्ष 2024 के मामले में विशेष न्यायालय का फैसला; पुलिस की विवेचना और अभियोजन की पैरवी के आधार पर सभी 6 आरोपियों को दोषी ठहराया गया
रायगढ़, 30 सितंबर। पुसौर थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में महिला से हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय (एट्रोसिटी एक्ट), रायगढ़ ने 28 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए सभी छह आरोपियों को दोषसिद्ध किया है। न्यायालय ने दो आरोपियों को आजीवन कारावास तथा चार आरोपियों को 20-20 वर्ष के कारावास से दंडित किया है।
न्यायालय के फैसले के अनुसार सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू और उत्तम मिरधा को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(v) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं कृष्णा उर्फ राहुल चौहान, नरेन्द्र उर्फ छोटू सिदार, बबलू चौहान और राहुल खड़िया को भारतीय न्याय संहिता की धारा 70(1) और 190 के तहत 20-20 वर्ष के कारावास से दंडित किया गया है।
19 अगस्त 2024 को सामने आया था मामला
अभियोजन के अनुसार, 19 अगस्त 2024 की शाम पीड़िता अकेले मेला देखने जा रही थी। इसी दौरान मुख्य मार्ग पर पूर्व परिचित आरोपी कृष्णा उर्फ राहुल चौहान अपने साथियों के साथ मिला। आरोप है कि आरोपियों ने महिला को जबरन तालाब की ओर ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
घटना के बाद पीड़िता किसी तरह वहां से निकलकर गांव की महिलाओं के पास पहुंची और उन्हें घटना की जानकारी दी। इसके बाद सरपंच को सूचना दी गई और 20 अगस्त 2024 को थाना पुसौर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
पुलिस ने अपराध क्रमांक 194/2024 के तहत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।
9 आरोपियों की हुई पहचान, नाबालिगों की कार्रवाई अलग
पुलिस के मुताबिक विवेचना के दौरान कुल 9 आरोपियों की पहचान हुई। इनमें से 8 को पकड़ा गया, जबकि दो विधि से संघर्षरत बालक पाए गए। एक अन्य विधि से संघर्षरत बालक फरार था, जिसकी मृत्यु हो जाने के कारण उसे प्रकरण से पृथक किया गया। दोनों विधि से संघर्षरत बालकों के विरुद्ध किशोर न्यायालय में पृथक से चालान प्रस्तुत किया गया।
मामले की प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी पुसौर निरीक्षक रोहित बंजारे ने की। इसके बाद तत्कालीन CSP रायगढ़ आकाश शुक्ला द्वारा विवेचना की गई। विवेचना के दौरान सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू और उत्तम मिरधा के विरुद्ध एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं।
साक्षियों की समय पर उपस्थिति पर पुलिस का जोर
रायगढ़ पुलिस के अनुसार, वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में प्रकरण से जुड़े साक्षियों की समय पर न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराई गई। पुलिस का कहना है कि इससे अभियोजन को न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में आधार मिला।
पुलिस ने बताया कि तत्कालीन CSP आकाश शुक्ला की विवेचना और विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल की पैरवी के बाद न्यायालय ने सभी छह आरोपियों को संबंधित धाराओं में दोषसिद्ध करते हुए सजा सुनाई। न्यायालय ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति योजना के तहत नियमानुसार प्रतिकर राशि दिए जाने की अनुशंसा भी की है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा
रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिला और कमजोर वर्ग के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों में पुलिस संवेदनशीलता और पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में साक्ष्य आधारित विवेचना, आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायालय में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिकता है। उनके अनुसार, इस मामले में आरोपियों को कठोर दंड मिलना पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।






