अकाउंट एग्रीगेटर की व्यवस्था होगी इंटरऑपरेबल, ग्राहक अपनी सहमति से अलग-अलग वित्तीय खातों की जानकारी एक जगह देख सकेंगे
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों के लिए वित्तीय जानकारी तक पहुंच आसान बनाने के उद्देश्य से दो अहम पहल की हैं। इनके तहत अलग-अलग अकाउंट एग्रीगेटर के बीच आपसी तालमेल की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके साथ ही डीमैट खाताधारकों के समेकित खाता विवरण यानी कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) में बैंक जमा खातों की जानकारी भी शामिल की जा सकेगी। इन बदलावों को 31 दिसंबर 2026 तक लागू किए जाने की उम्मीद है, जिससे ग्राहकों को 1 जनवरी 2027 से इसका लाभ मिल सकता है।
अकाउंट एग्रीगेटर से एक जगह मिलेगी वित्तीय जानकारी
अब तक अलग-अलग वित्तीय संस्थानों में मौजूद जानकारी हासिल करने के लिए ग्राहकों को संबंधित प्लेटफॉर्म या सेवा प्रदाता पर निर्भर रहना पड़ता था। नई व्यवस्था के तहत ग्राहक अपनी पसंद के किसी भी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी अकाउंट एग्रीगेटर (NBFC-AA) के माध्यम से विभिन्न वित्तीय सूचना प्रदाताओं से अपनी जानकारी प्राप्त करने और साझा करने की सुविधा का उपयोग कर सकेंगे।
यह प्रक्रिया ग्राहक की स्पष्ट सहमति पर आधारित होगी। यानी ग्राहक की अनुमति के बिना उसकी वित्तीय जानकारी साझा नहीं की जानी चाहिए। इससे अलग-अलग वित्तीय खातों की जानकारी तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिलेगी।
बैंक जमा और डीमैट निवेश की जानकारी एक ही स्टेटमेंट में
आरबीआई की नई पहल के तहत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमन वाली डिपॉजिटरी, जैसे NSDL और CDSL, अकाउंट एग्रीगेटर के माध्यम से बैंक जमा खातों की जानकारी को कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट में शामिल कर सकेंगी।
इससे डीमैट खाताधारकों को अपने शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों के निवेश के साथ बैंक जमा खातों की जानकारी भी एक ही समेकित विवरण में देखने की सुविधा मिल सकेगी। इससे अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन करना और अलग-अलग खातों पर नजर रखना आसान हो सकता है।
डीमैट खाता नहीं है तो भी मिल सकेगी वित्तीय जानकारी
इस व्यवस्था का लाभ केवल डीमैट खाताधारकों तक सीमित नहीं रहेगा। जिन लोगों के पास डीमैट खाता नहीं है, वे भी अकाउंट एग्रीगेटर के माध्यम से अपनी वित्तीय जानकारी का समेकित विवरण प्राप्त करने और सहमति के आधार पर साझा करने की सुविधा का उपयोग कर सकेंगे।
हालांकि, अलग-अलग वित्तीय संस्थानों की जानकारी को एक साथ देखने की सुविधा और एक ही आधिकारिक स्टेटमेंट में सभी खातों का विवरण शामिल होना दो अलग बातें हैं। किस प्रकार की जानकारी उपलब्ध होगी, यह संबंधित सेवा और लागू व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
भूली हुई जमा और निवेश की पहचान करना होगा आसान
कई बार लोगों के पुराने बैंक खातों या निवेश की जानकारी परिवार के सदस्यों तक नहीं पहुंच पाती। ऐसी स्थिति में जमा रकम या वित्तीय संपत्तियों का पता लगाने में परेशानी होती है।
आरबीआई की इस पहल से अलग-अलग वित्तीय संस्थानों में मौजूद खातों और जमा की जानकारी को एक जगह देखने में मदद मिल सकती है। इससे लोगों को अपनी वित्तीय संपत्तियों का बेहतर रिकॉर्ड रखने और भूली हुई रकम की पहचान करने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह व्यवस्था अपने आप किसी लावारिस खाते की रकम वापस नहीं दिलाती; उसके लिए संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
ग्राहक की सहमति और डेटा सुरक्षा अहम
अकाउंट एग्रीगेटर व्यवस्था में वित्तीय जानकारी साझा करने के लिए ग्राहक की स्पष्ट सहमति महत्वपूर्ण है। इसलिए ग्राहकों को किसी भी प्लेटफॉर्म पर अनुमति देने से पहले यह देखना चाहिए कि कौन-सी जानकारी साझा की जा रही है, किस उद्देश्य से और किसके साथ।
नई व्यवस्था का उद्देश्य वित्तीय जानकारी तक पहुंच को आसान और अधिक व्यवस्थित बनाना है। इसके लागू होने के बाद ग्राहकों को अपने बैंक जमा और निवेश की जानकारी पर नजर रखने में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है।











