
हरदीबाजार:- एसईसीएल दीपका प्रबंधन हरदीबाजार के भूविस्थापितों के मांगों को लेकर अपनी गंभीरता दिखाते नही दिख रही है। पूर्व में हुए 21 सितंबर सीएमडी मुख्यालय में बैठक व चर्चा का कोई ठोस जवाब नहीं आया और दो बार समय की मोहलत मांग कर प्रबंधन ने प्रयोजित सीएमडी आफिस मुख्यालय घेराव को टालने आग्रह किया। इस तरह यह तीसरी बैठक में भी दीपका प्रबंधन ने मोहलत मांगी है।

अतएव भूविस्थापितों की मांगों को लेकर एसईसीएल दीपका प्रबंधन ने 11 अक्टूबर को हरदीबाजार ग्राम सरपंच के नाम पत्र जारी कर 13 अक्टूबर को दोपहर 2.30 बजे एसईसीएल दीपका सभागार में बैठक की सूचना दी जिसके तारतम्य में मंगलवार को दोपहर 3 बजे एसईसीएल दीपका प्रबंधन, एसडीएम पाली व भूविस्थापितों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता शुरू हुई यह बैठक सायं 7 बजे तक चली ।

हरदीबाजार के सरपंच लोकेश्वर कंवर ने अपने 6 बिंदु रखे जिस पर खुलकर चर्चा हुई :-
1) मकानों के 60% कटौती मुआवजा को 100% करने की मांग पर प्रबंधन ने कहा बोर्ड में चर्चा उपरांत बताया जाएगा। 2) सन् 2004-2010 अधिग्रहण के बाद हुई लगभग 5 सौ रजिस्ट्री के मकान मालिकों को सोलसियम व बसाहट देने की मांग पर, प्रबंधन ने कहा बोर्ड में चर्चा उपरांत बताया जाएगा
3) उपसरपंच रेखा जायसवाल ने मांग रखी,बहु के नाम पर हुई मकानों की नापी पर सोलसियम देने पर चर्चा कर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा ।
4) सन् 2004 अधिग्रहण के समय मप्र पूंनर्वास नीति 1991 के लागू समय पर प्रत्येक खाता पर नौकरी देने की मांग पर प्रबंधन ने मामला हाईकोर्ट में लंबित है जो भी फैसला आऐगा मान्य करेंगे।
5) जयंती नगर बसाहट स्थल को ही सर्वसुविधायुक्त बसाहट बनाने,शुपेतपारा बाईपास बसाहट बडे झाड़ का जंगल की वजह से बसाहट देना संभव नही है।
6) हरदीबाजार की शेष बची 212 एकड़ जमीन को भी अधिग्रहण करने की मांग पर प्रबंधन ने कहा कि उसके नीचे कोयला नहीं है, अधिग्रहण भारत सरकार के आधीन है जो संभव नहीं है। बसाहट नहीं लेने पर 15 लाख रुपए, लेकिन 6 माह के भीतर नापी हुई लगभग 18 सौ मकान पूरी तरह जमींदोज होगा तब मिलेगा । और जो बसाहट लेना चाहते हैं उनका लिस्ट बनाने पंचायत को कहा गया है। भूविस्थापितों ने प्रबंधन से लास्ट ड्रोन सर्वे को मकानों के लिए कटआफ मनने की मांग रखी
वहीं प्रबंधन ने हरदीबाजार के सरपंच को एक ग्रामसभा आयोजित कर मांगों को पूर्ण रूप से प्रस्ताव बनाकर देने की बात कहीं है । सरपंच लोकेश्वर कंवर ने इस पर दशहरा उत्सव के बाद गांव में चर्चा कर , ग्रामसभा रखने की बात कही है। बैठक में चर्चा के दौरान ग्रामवासियों में आपसी नोंक-झोंक हुई जिसका पटाक्षेप अधिकारियों ने किया
बैठक में कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल जो बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे मुख्य रुप से उपस्थित थे, मुकेश जायसवाल ज़िप उपाध्यक्ष प्रतिनिधि, एसडीएम पाली रोहित सिंह,जीएम शरद तिवारी,गेवरा जीएम अशोक कुमार, सीएमडी मुख्यालय से आए एल एड आर के अधिकारी,सरपंच लोकेश्वर सिंह कंवर,पूर्व जनपद सदस्य अनिल टंडन, उपसरपंच श्रीमती रेखा जायसवाल, श्यामू जायसवाल, नरेश टंडन, डॉ विजय राठौर,रेंकी सरपंच तिजराम उर्रे, उपसरपंच शिव यादव, उमेश राठौर,प्रदीप राठौर, राजेश जायसवाल,रामू जायसवाल,लाला राठौर,प्रदीप पांडेय, लक्ष्मीनारायण साहू, मनीराम, जगदीश अग्रवाल, नरेंद्र राठौर, प्रियंका जायसवाल,ममता ओग्रे, राजेन्द्र जगत, मनमोहन खांडे,शशीधर सोनी, राजाराम राठौर सहित बड़ी संख्या में भूविस्थापित,ग्रामवासी शामिल हुए।
ग्रामीणों ने एसडीएम व जीएम से मांग रखी कि जब-तक मांगों पर पूरी तरह से लिखित सहमति नहीं मिल बन जाती तब तक किसी भी मकान मालिक को मकान तोड़ने को बाध्य न किया जाए।
समस्या अब भी बरकरार है: 1)जिनमें सबसे पहले एसईसीएल में भूविस्थापितों को 22 से 16 वर्ष अधिग्रहण के पश्चात भी नहीं मिली नौकरी,
2) राजस्व संबंधी मामला जिसमें वंश वृक्ष,फौती, नामांतरण जैसे गंभीर व बुनियादी समस्याएं बरकरार है जो गरीबों,कम पढ़े-लिखों के लिए किसी पहाड़ चढने के समान है।
3)हास्पिटल सहित 8-10 भवनों को जमींदोज करने के बाद आमगांव की खाली जमीन पर मिट्टी खोदाई 4-5 दिन से चल रहा है जिसका दायरा 2025 अधिग्रहण के एकदम नजदीक है जिसका डीआरआरसी भी नहीं हुई है जो घना आबादी है जिनके सामने धूल, ब्लास्टिंग व पानी की गंभीर समस्या आने वाले दिनों में होगी।
2) सन् 2004-2010 अधिग्रहण के बाद हुई लगभग 5 सौ रजिस्ट्री के मकान मालिकों को सोलसियम व बसाहट देने की मांग पर, प्रबंधन ने कहा बोर्ड में चर्चा उपरांत बताया जाएगा
3) उपसरपंच रेखा जायसवाल ने मांग रखी,बहु के नाम पर हुई मकानों की नापी पर सोलसियम देने पर चर्चा कर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा ।
4) सन् 2004 अधिग्रहण के समय मप्र पूंनर्वास नीति 1991 के लागू समय पर प्रत्येक खाता पर नौकरी देने की मांग पर प्रबंधन ने मामला हाईकोर्ट में लंबित है जो भी फैसला आऐगा मान्य करेंगे।
5) जयंती नगर बसाहट स्थल को ही सर्वसुविधायुक्त बसाहट बनाने,शुपेतपारा बाईपास बसाहट बडे झाड़ का जंगल की वजह से बसाहट देना संभव नही है।
6) हरदीबाजार की शेष बची 212 एकड़ जमीन को भी अधिग्रहण करने की मांग पर प्रबंधन ने कहा कि उसके नीचे कोयला नहीं है, अधिग्रहण भारत सरकार के आधीन है जो संभव नहीं है। बसाहट नहीं लेने पर 15 लाख रुपए, लेकिन 6 माह के भीतर नापी हुई लगभग 18 सौ मकान पूरी तरह जमींदोज होगा तब मिलेगा । और जो बसाहट लेना चाहते हैं उनका लिस्ट बनाने पंचायत को कहा गया है। भूविस्थापितों ने प्रबंधन से लास्ट ड्रोन सर्वे को मकानों के लिए कटआफ मनने की मांग रखी
वहीं प्रबंधन ने हरदीबाजार के सरपंच को एक ग्रामसभा आयोजित कर मांगों को पूर्ण रूप से प्रस्ताव बनाकर देने की बात कहीं है । सरपंच लोकेश्वर कंवर ने इस पर दशहरा उत्सव के बाद गांव में चर्चा कर , ग्रामसभा रखने की बात कही है। बैठक में चर्चा के दौरान ग्रामवासियों में आपसी नोंक-झोंक हुई जिसका पटाक्षेप अधिकारियों ने किया

बैठक में कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल जो बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे मुख्य रुप से उपस्थित थे, मुकेश जायसवाल ज़िप उपाध्यक्ष प्रतिनिधि, एसडीएम पाली रोहित सिंह,जीएम शरद तिवारी,गेवरा जीएम अशोक कुमार, सीएमडी मुख्यालय से आए एल एड आर के अधिकारी,सरपंच लोकेश्वर सिंह कंवर,पूर्व जनपद सदस्य अनिल टंडन, उपसरपंच श्रीमती रेखा जायसवाल, श्यामू जायसवाल, नरेश टंडन, डॉ विजय राठौर,रेंकी सरपंच तिजराम उर्रे, उपसरपंच शिव यादव, उमेश राठौर,प्रदीप राठौर, राजेश जायसवाल,रामू जायसवाल,लाला राठौर,प्रदीप पांडेय, लक्ष्मीनारायण साहू, मनीराम, जगदीश अग्रवाल, नरेंद्र राठौर, प्रियंका जायसवाल,ममता ओग्रे, राजेन्द्र जगत, मनमोहन खांडे,शशीधर सोनी, राजाराम राठौर सहित बड़ी संख्या में भूविस्थापित,ग्रामवासी शामिल हुए।
ग्रामीणों ने एसडीएम व जीएम से मांग रखी कि जब-तक मांगों पर पूरी तरह से लिखित सहमति नहीं मिल बन जाती तब तक किसी भी मकान मालिक को मकान तोड़ने को बाध्य न किया जाए।
समस्या अब भी बरकरार है: 1)जिनमें सबसे पहले एसईसीएल में भूविस्थापितों को 22 से 16 वर्ष अधिग्रहण के पश्चात भी नहीं मिली नौकरी,
2) राजस्व संबंधी मामला जिसमें वंश वृक्ष,फौती, नामांतरण जैसे गंभीर व बुनियादी समस्याएं बरकरार है जो गरीबों,कम पढ़े-लिखों के लिए किसी पहाड़ चढने के समान है।
3)हास्पिटल सहित 8-10 भवनों को जमींदोज करने के बाद आमगांव की खाली जमीन पर मिट्टी खोदाई 4-5 दिन से चल रहा है जिसका दायरा 2025 अधिग्रहण के एकदम नजदीक है जिसका डीआरआरसी भी नहीं हुई है जो घना आबादी है जिनके सामने धूल, ब्लास्टिंग व पानी की गंभीर समस्या आने वाले दिनों में होगी।












