महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस सिंडिकेट का संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। देश के विभिन्न राज्यों में फैले फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाओं के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश समेत कई खेलों और आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए CBI की विशेष टीम महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमोटर और प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लेकर पहुंची है।
म्यूल बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी रकम
CBI की जांच में सामने आया है कि सट्टेबाजी से अर्जित कथित अवैध कमाई को छिपाने के लिए म्यूल बैंक खातों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया था। इन खातों का इस्तेमाल दूसरे लोगों के नाम पर बैंक लेनदेन करने के लिए किया जाता था। रकम को कई स्तरों पर अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करने के बाद हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजे जाने का आरोप है।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि अवैध कमाई का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित तौर पर संरक्षण राशि के रूप में दिया जाता था, ताकि सट्टेबाजी का कारोबार निर्बाध रूप से संचालित होता रहे।
रेड कॉर्नर नोटिस के बाद ओमान में पकड़ा गया सौरभ चंद्राकर
CBI की विशेष टीम रविवार को सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लेकर पहुंची। उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद उसे ओमान में हिरासत में लिया गया। भारत सरकार की एजेंसियों, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच समन्वय के बाद उसे भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
चंद्राकर दो CBI मामलों में वांछित था, जिनमें आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दर्ज धनशोधन मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है। उसे सोमवार को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किए जाने की संभावना है।
देशभर में फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाओं के जरिए चलता था कारोबार
CBI के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक केवल एक सट्टेबाजी ऐप तक सीमित नहीं था, बल्कि यह संगठित सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था। इसके तहत अलग-अलग राज्यों में फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाएं बनाई गई थीं। स्थानीय स्तर पर लोगों को जोड़कर सट्टेबाजी कराई जाती थी और उपयोगकर्ताओं से रकम जमा कराई जाती थी।
जांच में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को इस नेटवर्क के प्रमुख संचालकों में शामिल बताया गया है। एजेंसी के मुताबिक, इनके सहयोगियों और पैनल संचालकों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अवैध कमाई को बैंक खातों, विभिन्न वित्तीय लेनदेन और हवाला के जरिए विदेश पहुंचाने के लिए व्यवस्थित तंत्र तैयार किया गया था।
CBI के 11 आरोपपत्र, ED ने 1,700 करोड़ की संपत्तियां की थीं कुर्क
इस मामले में CBI अब तक कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। 9 जुलाई 2026 को जारी सरकारी जानकारी के अनुसार, एजेंसी ने महादेव ऐप से जुड़े दो मामलों में कुल 11 आरोपपत्र दाखिल किए थे। इनमें 66 आरोपियों के खिलाफ पांच आरोपपत्र भी शामिल थे। जांच में पैनल संचालकों, हवाला कारोबारियों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस मामले में कार्रवाई की है। मार्च 2026 में ED ने दुबई और नई दिल्ली स्थित 20 अचल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश जारी किया था। इन संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,700 करोड़ रुपये बताया गया था। ED के अनुसार, ये संपत्तियां कथित तौर पर अवैध सट्टेबाजी से अर्जित अपराध की कमाई से खरीदी गई थीं।











