रायगढ़। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं से ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा गांव की सरस्वती स्व-सहायता समूह की 10 महिलाएं रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। समूह को इस कार्य से हर महीने करीब 50 हजार रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। महिलाएं अब न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं तक पोषण आहार पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
बिहान योजना से मिला आजीविका का अवसर, अप्रैल 2026 से शुरू किया रेडी-टू-ईट निर्माण
डूमरमुड़ा की सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य चम्पा चौहान बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिले। इसी क्रम में अप्रैल 2026 से समूह को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का काम मिला। इससे महिलाओं को नियमित रोजगार के साथ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर प्राप्त हुआ।
गेहूं, चना और सोयाबीन से तैयार होता है पोषण आहार
समूह की सदस्य चम्पा चौहान के अनुसार, सभी महिलाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत रेडी-टू-ईट का निर्माण करती हैं। सबसे पहले गेहूं, चना, सोयाबीन और अन्य आवश्यक सामग्री की मशीनों से सफाई की जाती है। इसके बाद भुनाई, पिसाई और छनाई की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
तैयार सामग्री को मिक्सिंग मशीन में निर्धारित अनुपात और समय के अनुसार मिलाया जाता है। मिश्रण तैयार होने के बाद उसकी पैकिंग की जाती है। आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त मांगपत्र के आधार पर समूह द्वारा तैयार पोषण आहार का वितरण किया जाता है।
हर महीने 50 हजार रुपये तक मुनाफा, परिवार की आर्थिक स्थिति में कर रहीं सहयोग
रेडी-टू-ईट निर्माण और वितरण के कार्य से सरस्वती स्व-सहायता समूह को हर महीने करीब 50 हजार रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। चम्पा चौहान बताती हैं कि अब समूह की महिलाएं अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं आय अर्जित कर रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में भी उनका योगदान बढ़ा है।
जिले के 2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 10 महिला समूहों का चयन
गौरतलब है कि रायगढ़ जिले में कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनके लिए 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। इन समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के अंतर्गत पूंजीगत सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है।
महिला सशक्तिकरण के साथ पोषण अभियान को भी मिल रहा सहयोग
राज्य शासन की इस पहल से एक ओर ग्रामीण महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार और नियमित आय का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं तक पूरक पोषण आहार पहुंचाने में भी मदद मिल रही है।
डूमरमुड़ा की सरस्वती स्व-सहायता समूह की महिलाएं इस बात का उदाहरण बन रही हैं कि सामूहिक प्रयास, सरकारी योजनाओं और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।











