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VIDEO टूट गया कुरोपहरी का जीवनमार्ग : लैलूंगा के चिरईखार पंचायत के ग्रामीण रास्ता संकट में फंसे, जनजीवन ठप!

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टूट गया कुरोपहरी का जीवनमार्ग: लैलूंगा के चिरईखार पंचायत के ग्रामीण रास्ता संकट में फंसे, जनजीवन ठप!

लैलूंगा, 25 जुलाई 2025
लैलूंगा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत चिरईखार के आश्रित ग्राम कुरोपहरी के ग्रामीण इन दिनों भारी संकट से जूझ रहे हैं। गांव का मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह से टूट चुका है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। बारिश और प्रशासनिक अनदेखी ने मिलकर गांव को मानो अलग-थलग कर दिया है।

बारिश के कारण जगह-जगह सड़क धंस गई है, मिट्टी बह चुकी है और जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। परिणामस्वरूप न तो बच्चे स्कूल जा पा रहे हैं, न मरीज इलाज के लिए बाहर जा सकते हैं, और न ही ग्रामीण बाजार या काम पर जा पा रहे हैं। हालात ऐसे हो चुके हैं कि छोटे वाहन तो दूर, पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।

रास्ता टूटा, उम्मीद भी टूटी
गांव के बुजुर्ग ने बताया, “ये रास्ता ही हमारा जीवन था। अब तो बीमार को अस्पताल ले जाने का भी कोई साधन नहीं बचा। एम्बुलेंस तक गांव तक नहीं आ सकती।” ग्रामीणों ने बताया कि कई बार पंचायत और जनपद अधिकारियों को मौखिक रूप से शिकायत की गई, लेकिन आज तक न कोई निरीक्षण हुआ, न ही कोई कार्यवाही।

बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर
गांव के शिक्षक और अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की है कि स्कूल खुलने के बावजूद बच्चे घरों में ही बैठे हैं। न तो स्कूल वाहन पहुंच सकता है, न बच्चे स्वयं इस खतरनाक मार्ग से जा सकते हैं। एक ग्रामीण महिला बताती हैं, “हमारे बच्चे पढ़ना चाहते हैं, लेकिन रास्ता ही नहीं है। कैसे भेजें?”

प्रशासन पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। वर्षों से यह मार्ग जर्जर स्थिति में था, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया। गांव के युवाओं ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कर प्रशासन को नींद से जगाने की कोशिश की है।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी खल रही
आश्चर्य की बात यह है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप हैं। न किसी ने दौरा किया, न कोई राहत कार्य शुरू हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय जो नेता बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वो अब फोन तक नहीं उठाते।

जनता की मांग: जल्द हो रास्ता दुरुस्त
ग्रामवासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अगर जल्द ही सड़क मरम्मत और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। विशेषकर बरसात के इन महीनों में अगर कोई आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसका जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ प्रशासन होगा।

कुरोपहरी गांव का टूटा रास्ता केवल एक भौतिक समस्या नहीं है, यह ग्रामीणों के जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार से जुड़ा गंभीर सवाल है। यदि समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो यह मामला बड़ा जन आंदोलन बन सकता है। अब देखना यह है कि अधिकारियों की नींद कब टूटती है।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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