मनरेगा से बदली बंजर भूमि की तक़दीर, तमनार में हरियाली बनी ग्रामीण आजीविका का सहारा

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मनरेगा से बदली बंजर भूमि की तक़दीर, तमनार में हरियाली बनी ग्रामीण आजीविका का सहारा


ग्राम पंचायत बिजना में वृक्षारोपण से मिला रोजगार, 707 मानव दिवस का हुआ सृजन

पर्यावरण संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता की ओर कदम, कस्तूरी बनी प्रेरणा

रिपोर्ट ~ हीरालाल राठिया लैलूंगा


रायगढ़,8 जनवरी 2025। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अब केवल मजदूरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर आजीविका का मजबूत माध्यम बनती जा रही है। रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बिजना में मनरेगा के तहत किए गए वृक्षारोपण कार्य ने बंजर भूमि को हरियाली में बदलते हुए ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिखी है।
इस योजना के तहत स्वीकृत इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना, पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना और आय के स्थायी साधन विकसित करना था। परियोजना के अंतर्गत स्व सहायता समूह से जुड़ी हितग्राही कस्तूरी/छडानन द्वारा वृक्षारोपण कार्य का सफल क्रियान्वयन किया गया। कुल 1.70 लाख रुपए की लागत से (मजदूरी मद 1.18 लाख एवं सामग्री मद 0.52 लाख) यह कार्य 31 जुलाई 2020 को प्रारंभ होकर 31 अगस्त 2022 को पूर्ण हुआ। इस दौरान 707 मानव दिवस का सृजन हुआ, जिससे गांव के कई अकुशल श्रमिकों को निरंतर रोजगार मिला। लगातार तीन वर्षों से इस योजना के तहत मैटेनेंश किया गया।
औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद ग्राम पंचायत बिजना में इस पहल से न केवल बंजर भूमि का कायाकल्प हुआ, बल्कि हरियाली बढ़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ठोस कदम उठाया गया। कभी अनुपयोगी पड़ी भूमि पर अब लगाए गए पौधे गांव की पहचान बनते जा रहे हैं और ग्रामीणों में प्रकृति के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।
कार्य की स्वीकृति के के बाद ग्राम पंचायत द्वारा तकनीकी सहायक के मार्गदर्शन में योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। हितग्राही कस्तूरी ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से न केवल वृक्षारोपण में सक्रिय सहभागिता निभाई, बल्कि अन्य ग्रामीणों को भी इसके लाभों से अवगत कराया। हितग्राही के अनुसार, मनरेगा योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने सरपंच, सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक से संपर्क किया, जिसके बाद जनपद पंचायत तमनार के अधिकारियों के सहयोग से कार्य सुचारू रूप से संपन्न हुआ। लगभग 200 पौधों के रोपण एवं उनके संरक्षण की तकनीकी जानकारी मिलने से भविष्य में आय के स्थायी साधन विकसित होने की उम्मीद और मजबूत हुई है।
मनरेगा के माध्यम से एक ओर जहां ग्रामीणों को सम्मानजनक रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी ठोस परिवर्तन संभव हो रहा है।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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