Sahkar Se Samriddhi Workshop: बस्तर में पहली बार केंद्रीय मंत्रालय के स्तर पर आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला में सहकारिता के जरिए किसान आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर मंथन किया जा रहा है।
जगदलपुर। बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘सहकार से समृद्धि’ वर्कशॉप का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। बस्तर में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा इस स्तर के राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। ऐसे में सहकारिता क्षेत्र के लिए इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
सहकारिता से दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों को विकास से जोड़ने पर फोकस
राष्ट्रीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सहकारिता आंदोलन के माध्यम से देश के दूरस्थ, आकांक्षी और जनजातीय क्षेत्रों तक विकास और आर्थिक अवसरों का लाभ पहुंचाने पर चर्चा करना है। कार्यशाला में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, सहकारी संस्थाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
15 राज्यों के सचिव और 14 राज्यों के पंजीयक शामिल
छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना के मुताबिक, कार्यशाला में 15 राज्यों के सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के पंजीयक हिस्सा ले रहे हैं। दो दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के अधिकारी सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, नवाचारों और अपने अनुभवों को साझा करेंगे।
डॉ. प्रसन्ना ने कहा कि बस्तर विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सहकारिता के माध्यम से स्थानीय आजीविका को मजबूत करने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
लघु फिल्म में दिखाए गए सहकारिता के नवाचार
कार्यशाला की शुरुआत देशभर में सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न नवाचारों पर आधारित लघु फिल्म के प्रदर्शन के साथ हुई। फिल्म के माध्यम से सहकारी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे कार्यों और उनके प्रभाव को प्रतिभागियों के सामने प्रस्तुत किया गया।
सहकारी समितियों के उत्पादों की प्रदर्शनी
सम्मेलन स्थल पर विभिन्न सहकारी समितियों और संस्थाओं की ओर से स्टॉल भी लगाए गए हैं। इनमें संबंधित संस्थाओं द्वारा तैयार किए गए स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। इन स्टॉल के जरिए प्रतिभागियों को सहकारी गतिविधियों और स्थानीय उत्पादों को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।
बस्तर में सहकारिता के विस्तार पर रहेगा जोर
दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान राज्यों के अनुभवों और नवाचारों के आदान-प्रदान के साथ यह भी चर्चा होगी कि सहकारिता के मॉडल को दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में किस तरह अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। खासतौर पर किसान आय, रोजगार और स्थानीय आजीविका को सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर फोकस रहेगा।






