परिसीमन और संविधान संशोधन पर विशेष सत्र: क्या बदलने वाला है देश का राजनीतिक नक्शा?

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स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डेस्क   हाइलाइट बॉक्स

  • संसद में दो दिन का विशेष सत्र कल से शुरू
  • संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक पर होगी चर्चा
  • राज्यों से 815 और केंद्रशासित प्रदेशों से 35 सांसद चुने जाने का प्रस्ताव
  • देश की राजनीतिक संरचना में बड़े बदलाव की संभावना

विशेष सत्र का उद्देश्य क्या है?

केंद्र सरकार द्वारा बुलाया गया यह दो दिवसीय विशेष सत्र संविधान संशोधन विधेयक और नए परिसीमन (Delimitation) प्रस्ताव पर केंद्रित रहेगा। सरकार का लक्ष्य देश की जनसंख्या के आधार पर संसदीय सीटों का पुनर्निर्धारण करना है, जिससे प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और न्यायसंगत बनाया जा सके। यह कदम लंबे समय से लंबित परिसीमन प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

कितने सांसद होंगे और क्या होगा बदलाव?

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, भविष्य में लोकसभा में राज्यों से 815 सांसद और केंद्रशासित प्रदेशों से 35 सांसद चुने जा सकते हैं। वर्तमान में लोकसभा की कुल सीटें 543 हैं, ऐसे में यह बदलाव संसद की संरचना को व्यापक रूप से प्रभावित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, लेकिन कुछ राज्यों की राजनीतिक ताकत भी बदल सकती है।

परिसीमन विधेयक का क्या असर पड़ेगा?

परिसीमन विधेयक लागू होने के बाद राज्यों की सीटों का पुनर्गठन होगा, जिससे कुछ राज्यों में सीटें बढ़ सकती हैं जबकि कुछ में स्थिर रह सकती हैं। यह प्रक्रिया जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तय होगी। इससे खासकर उत्तर भारत के राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि दक्षिणी राज्यों में संतुलन को लेकर बहस तेज हो सकती

राजनीतिक प्रतिक्रिया और बहस

इस प्रस्ताव पर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस शुरू हो चुकी है। कुछ दल इसे लोकतांत्रिक सुधार बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक लाभ का प्रयास मान रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि इस तरह के बड़े बदलाव से पहले व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है, जबकि सरकार इसे पारदर्शी और संवैधानिक प्रक्रिया बता रही है।

आगे क्या होगा?

आने वाले दो दिन संसद के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं, क्योंकि इस दौरान लिए गए फैसले देश की राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं। यदि विधेयक पारित होता है, तो यह भारत की लोकतांत्रिक संरचना में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत होगा, जिसका असर आने वाले चुनावों और शासन व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देगा।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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