
जांजगीर-चांपा जिले में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग और अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘ईसीसीई कॉन्क्लेव 2026’ का आयोजन किया गया। इस कॉन्क्लेव ने आंगनवाड़ी केन्द्रों की भूमिका, गुणवत्ता और नवाचारों पर व्यापक विमर्श का मंच प्रदान किया।
जांजगीर-चांपा में आयोजित इस ईसीसीई कॉन्क्लेव में जिले के सभी परियोजना अधिकारी एवं सेक्टर सुपरवाइजरों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम की शुरुआत आकर्षक ‘गैलरी वॉक’ से हुई, जिसमें विभिन्न परियोजनाओं द्वारा किए जा रहे नवाचारी कार्यों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें प्रमुख रूप से ईसीसीई मेला, पालकों से बेहतर जुड़ाव के लिए ईसीसीई दिवस, ईसीसीई कॉन्फ्रेंस, मासिक अकादमिक सेक्टर बैठक, पोषण पखवाड़ा, किशोरी युवा क्लब, समर कैंप आदि को प्रदर्शित किया गया था। प्रतिभागियों ने एक-दूसरे के कार्यों का अवलोकन कर सीखने का अवसर प्राप्त किया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में जांजगीर परियोजना की परियोजना अधिकारी अणिमा मिश्रा ने संदर्भ स्थापना प्रस्तुत करते हुए राष्ट्र निर्माण में आंगनवाड़ी केन्द्रों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि केन्द्रों को और प्रभावी बनाकर विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
अकलतरा परियोजना की अपर्णा शर्मा ने ‘थीम आधारित मासिक बैठक’ के सफल क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सेक्टर स्तर पर नियमित बैठकों के माध्यम से आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं को प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे वे बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण गतिविधियाँ कर पाती हैं। जांजगीर परियोजना की ऋचा शर्मा और शिप्रा साहू ने ‘ईसीसीई दिवस एवं पोषण चौपाल’ के अंतर्गत किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों को साझा किया। उन्होंने बताया कि पालकों एवं समुदाय की सहभागिता बढ़ाकर बच्चों को सुपोषित आहार और खेल-आधारित शिक्षा से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
बम्हनीडीह परियोजना की पर्यवेक्षक रजनी साहू ने ‘ईसीसीई मेला’ की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंच शिक्षिकाओं को एक-दूसरे से सीखने और अपने कार्यों को प्रस्तुत करने का अवसर देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मेला केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि निरंतर प्रयासों का परिणाम होता है। लता ठाकुर ने ‘मॉडल आंगनवाड़ी से मॉडल सेक्टर की ओर’ विषय पर अपने विचार रखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई। विनीता मिश्रा द्वारा ‘किशोरी युवा क्लब’, अश्वनी कौशिक ने ‘समर कैंप’ और आंगनवाड़ी शिक्षिका रश्मि टंडन एवं पर्यवेक्षक संतोषी देवांगन ने ‘ईसीसीई कॉन्फ्रेंस’ के संदर्भ में अपनी प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) अनीता अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि “ईसीसीई में हमें दबाव में नहीं, बल्कि पूरी लगन और मन से कार्य करने की आवश्यकता है।”
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्र अब केवल पोषण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों के समग्र विकास के लिए पोषण के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को भी प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि वे बच्चों के भविष्य की नींव तैयार करती हैं। यदि कार्यकर्ता समर्पण और नवाचार के साथ कार्य करें, तो आंगनवाड़ी केन्द्र समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मजबूत आधार बन सकते हैं।
कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों के साझा संकल्प के साथ हुआ, जिसमें आंगनवाड़ी केन्द्रों को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करने की बात कही गई। इस कॉन्क्लेव में सभी परियोजना अधिकारियों ने अपने -अपने परियोजना के उत्कृष्ट कार्यों को प्रस्तुत किया और एक दूसरे परियोजना के कार्यों से अवगत होते हुए सीखने की प्रेरणा ली।







