
“महंगाई और पेलमा मुद्दे पर सरकार के खिलाफ NSUI का हल्लाबोल”
“किसान, युवा और मजदूर की लड़ाई लड़ रही NSUI — रोशन साहू”
“पेट्रोल-डीजल की मार, पेलमा पर वार — सरकार पर बरसे रोशन साहू”
“जनता त्रस्त, सरकार मस्त — NSUI नेता रोशन साहू का तीखा हमला”
“आज देश और प्रदेश की जनता दोहरी मार झेल रही है।
एक तरफ महंगाई की आग में हर गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग जल रहा है,
तो दूसरी तरफ बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए जनता की जमीन और जंगल छीने जा रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं।
हर सुबह जनता की नींद नए रेट के साथ खुलती है।
डीजल महंगा होने से खेती महंगी हो गई,
ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया,
राशन महंगा हो गया,
और अब आम आदमी का घर चलाना मुश्किल हो गया है।
सरकार बड़े-बड़े भाषण देती है,
लेकिन जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक?
कब तक गरीब आदमी महंगाई की मार सहता रहेगा?
कब तक युवा बेरोजगारी और महंगाई के बीच पिसता रहेगा?
आज गांव का किसान परेशान है।
उसके ट्रैक्टर में डीजल भरवाना भारी पड़ रहा है।
छात्र परेशान हैं क्योंकि बसों का किराया बढ़ गया है।
मजदूर परेशान है क्योंकि रोज कमाने वाला आदमी अब रोज खाने तक के लिए संघर्ष कर रहा है।
और दूसरी तरफ पेलमा कोयला परियोजना को लेकर जो जनसुनवाई हो रही है,
उसमें स्थानीय लोगों की भावनाओं और अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
गांव के लोग साफ कह रहे हैं कि
जल, जंगल और जमीन हमारी पहचान है।
लेकिन सरकार और कंपनियां सिर्फ मुनाफा देख रही हैं।
क्या विकास का मतलब सिर्फ खदान खोदना है?
क्या विकास का मतलब गांव उजाड़ना है?
क्या विकास का मतलब किसानों की जमीन छीनना है?
पेलमा के लोग डरे हुए हैं।
उन्हें अपने भविष्य की चिंता है।
उन्हें डर है कि आने वाले समय में उनका गांव, उनका पर्यावरण और उनका जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
जनसुनवाई का मतलब जनता की राय लेना होता है,
लेकिन यहां जनता की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
जो लोग सवाल पूछ रहे हैं, उन्हें रोका जा रहा है।
जो लोग विरोध कर रहे हैं, उनकी आवाज़ दबाई जा रही है।
NSUI यह साफ कहना चाहती है कि
हम जनता की आवाज़ बनकर खड़े रहेंगे।
हम युवाओं, किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
अगर सरकार सच में जनता के साथ है,
तो सबसे पहले पेट्रोल-डीजल के दाम कम करे।
महंगाई पर नियंत्रण करे।
और पेलमा परियोजना में स्थानीय लोगों की सहमति के बिना कोई फैसला न लिया जाए।
यह लड़ाई सिर्फ एक गांव की नहीं है।
यह लड़ाई हर उस नागरिक की है
जो अपने अधिकार, अपनी जमीन और अपने भविष्य को बचाना चाहता है।
आज जरूरत है एकजुट होने की।
जरूरत है आवाज उठाने की।
जरूरत है उन लोगों को जवाब देने की
जो जनता की समस्याओं पर चुप बैठे हैं।
हम डरने वाले नहीं हैं।
हम झुकने वाले नहीं हैं।
जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।
जब-जब अन्याय होगा,
तब-तब युवा सड़क पर उतरेंगे।
और NSUI जनता की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी।”
“महंगाई से त्रस्त जनता और पेलमा की आवाज़ को दबाने वालों को अब जवाब देना होगा…
क्योंकि युवा जाग चुका है, और जनता अब चुप नहीं बैठेगी।”








