
जिला बिलासपुर
बिलासपुर। वनवासी कल्याण कुंज आश्रम में आयोजित ग्रीष्मकालीन शिक्षण वर्ग शिविर में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आई छात्राओं को स्वास्थ्य, स्वच्छता, आत्मविश्वास एवं राष्ट्रसेवा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई। शिविर में भारत स्काउट एंड गाइड की जिला संगठन आयुक्त (गाइड) डॉ. पूनम सिंह ने प्रेरणादायी उद्बोधन देते हुए छात्राओं को जागरूकता और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया।
डॉ. पूनम सिंह ने ‘मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर खुलकर चर्चा करते हुए छात्राओं को वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और संकोच को दूर करना आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं सही देखभाल के उपाय सरल भाषा में समझाए और इस विषय को सहजता से अपनाने के लिए प्रेरित किया।


इस दौरान उन्होंने स्काउट-गाइड गतिविधियों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्काउटिंग केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व, सेवाभाव और राष्ट्रप्रेम की पाठशाला है। उन्होंने छात्राओं से जीवन में सेवा और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया।
रेंजर लीडर निशा साहू एवं गाइड कैप्टन कौशल्या साहू ने छात्राओं को राज्यपाल अवार्ड, राष्ट्रपति अवार्ड, क्लैपिंग, आपदा प्रबंधन तथा एडवेंचर हाईक जैसी गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन गतिविधियों से साहस, आत्मविश्वास और जीवन कौशल का विकास होता है। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछकर जानकारी प्राप्त की और सत्र को प्रेरणादायी बताया।

कार्यक्रम में उपस्थित छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे स्काउटिंग गतिविधियों से जुड़कर समाज एवं राष्ट्रहित में सेवा कार्य करेंगी। इस अवसर पर डॉ. पूनम सिंह को श्रीमती आरती दांडेकर द्वारा आमंत्रित किया गया था।
सत्र के दौरान डॉ. सिंह ने सभी छात्राओं को सैनिटरी पैड वितरित करते हुए उसके सुरक्षित उपयोग, समय-समय पर बदलाव तथा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की जानकारी भी दी। सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने में आर्यन एवं महेंद्र सूर्यवंशी का विशेष सहयोग रहा।
अपने संबोधन में डॉ. पूनम सिंह ने कहा, “ज्ञान दीपक के समान है। इसे केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि घर-परिवार, मित्रों और समाज तक पहुंचाकर जागरूकता फैलाएं। यदि हम जागरूक हैं, तो दूसरों को जागरूक करना भी हमारा दायित्व है।”
कार्यक्रम का समापन ‘मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन’ की सामूहिक शपथ के साथ हुआ। छात्राओं ने स्वयं स्वच्छता अपनाने और समाज में फैली गलत धारणाओं को दूर करने का संकल्प लिया।
यह शिविर केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी मंच बनकर उभरा।








