



15वें वित्त आयोग की राशि में कथित अनियमितता और स्वच्छता संबंधी शिकायत को लेकर नया विवाद, पंच अशोक कुमार प्रधान ने उठाए सवाल
लैलूंगा- सुशासन की सरकार विष्णुदेव की सरकार ने राज्य में मांग शिकायत के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 जारी किया है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) में दर्ज शिकायतों के निष्पक्ष निराकरण पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत झगरपुर के पंच अशोक कुमार प्रधान ने जनपद पंचायत लैलूंगा के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी शिकायत का वास्तविक निराकरण किए बिना ही उसे बंद कराने का प्रयास किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में ग्राम पंचायत झगरपुर में 15वें वित्त आयोग की राशि से बिना कार्य कराए भुगतान किए जाने की कथित अनियमितता, स्वच्छता कार्यों में लापरवाही, कचरा कलेक्शन तथा अन्य विकास कार्यों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि शिकायत पर निष्पक्ष जांच कराने के बजाय जनपद पंचायत की ओर से उन्हें एक लिखित दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, ताकि शिकायत का निराकरण दर्शाकर उसे बंद किया जा सके।
बिना जांच शिकायत बंद कराने का आरोप
पंच अशोक कुमार प्रधान का कहना है कि उन्हें दिए गए दस्तावेज़ में यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि गांव में सफाई कार्य नियमित रूप से हो रहा है तथा अन्य कार्य पंचायत के प्रस्ताव के अनुसार किए गए हैं। जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि जिन बिंदुओं पर शिकायत की गई थी, उनका मौके पर सत्यापन ही नहीं हुआ था।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों और कर्मचारियों का उद्देश्य शिकायत का वास्तविक समाधान करना नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के रिकॉर्ड में शिकायत का शीघ्र निपटारा दिखाना था।
हस्ताक्षर से इनकार के बाद पहुंची जांच टीम
शिकायतकर्ता के अनुसार जब उन्होंने बिना वास्तविक जांच और समाधान के किसी भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, तब 04 जुलाई 2026 को जनपद पंचायत लैलूंगा की जांच टीम दोबारा ग्राम झगरपुर पहुंची। टीम ने पंचायत भवन में सरपंच, सचिव, पंचों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में भौतिक सत्यापन किया और जांच प्रतिवेदन तैयार किया।
प्रतिवेदन में पानी टंकी निर्माण, ट्रांसपोर्ट कार्य, नाली सफाई तथा अन्य विकास कार्यों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि दोबारा जांच की आवश्यकता पड़ी, तो इससे यह सवाल उठता है कि पहले शिकायत के निराकरण का प्रयास किस आधार पर किया जा रहा था।
जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवालशिकायतकर्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम नागरिकों को न्याय दिलाने का माध्यम है, लेकिन यदि बिना जांच शिकायतों को बंद करने का प्रयास किया जाएगा, तो इससे पूरी शिकायत निवारण प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होगी। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर यह पता लगाया जाए कि शिकायत का वास्तविक निराकरण किए बिना दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किसके निर्देश पर किया गया।
उन्होंने यह भी मांग की कि यदि जांच में अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही अथवा नियमों के विपरीत कार्यवाही सामने आती है, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
संबंधित पक्ष का पक्ष
समाचार लिखे जाने तक जनपद पंचायत लैलूंगा अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।









