
पत्थलगांव । “देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के तारतम्य में , पत्थलगांव नगर में गुरु पूर्णिमा का भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । संघ के छह प्रमुख उत्सवों में से एक ‘गुरु पूर्णिमा’ को लेकर स्वयंसेवकों में भारी उत्साह देखा गया । कार्यक्रम में “तन समर्पित मन समर्पित और यह जीवन समर्पित, चाहता हूं मां तुझे कुछ और भी दूं” का भाव हर स्वयंसेवक के चेहरे पर स्पष्ट झलक रहा था।
शताब्दी वर्ष और नई कार्यकारिणी से मिली नई ऊर्जा
संघ के शताब्दी वर्ष को भव्य बनाने के लिए प्रत्येक स्वयंसेवक अपना शत-प्रतिशत योगदान दे रहा है। हाल ही में पत्थलगांव में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है, जिसने संघ कार्य में एक नई ऊर्जा का संचार किया है।

इसी ऊर्जा और तन-मन-धन के समर्पण का परिणाम रहा कि पत्थलगांव के इतिहास में पहली बार गुरु पूर्णिमा के दिन ही इतने भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस गरिमामयी समारोह में 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। इनमें बाल, तरुण और प्रौढ़ स्वयंसेवकों के साथ-साथ नगर के व्यवसायी स्वयंसेवकों ने भी पूर्ण गणवेश धारण कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

भगवा ध्वज ही है सनातन का शाश्वत गुरु
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वनवासी कल्याण आश्रम के उपाध्यक्ष विजय अग्रवाल उपस्थित रहे, जिन्होंने सभी स्वयंसेवकों और नगरवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
वहीं, कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेन्द्र बेसरा जी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने परम पवित्र भगवा ध्वज को गुरु रूप में स्वीकार करने की ऐतिहासिक और वैचारिक कहानी का विस्तार से वर्णन किया।उन्होंने कहा कि भगवा ध्वज आदिकाल से सनातन धर्म और संस्कृति का शाश्वत प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि संघ का वर्ष भर का कार्य गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्वयंसेवकों द्वारा किए गए स्वैच्छिक ‘समर्पण राशि’ से ही संचालित होता है, जिसे हर स्वयंसेवक पूर्ण श्रद्धा और भाव के साथ गुरु के चरणों में अर्पित करता है।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में नगर कार्यकारिणी और व्यवस्थापकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई :
संचालन : पवन अग्रवाल (नगर कार्यवाह) , मुख्य शिक्षक : निकेत अग्रवाल (शारीरिक प्रमुख) , व्यवस्था : विकास अग्रवाल (व्यवस्था प्रमुख) , अमृत वचन : रविशंकर यादव (बौद्धिक प्रमुख) , सुभाषित : डेमूधर बंजारा (बाल कार्य प्रमुख) , गीत : कृतिवास दीवान जी (शाखा पालक) ,
इसके अतिरिक्त , संपूर्ण कार्यक्रम की अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं आदित्य अग्रवाल (सह सेवा प्रमुख) , राहुल शर्मा (गौ संवर्धन प्रमुख) , सुनील बेहरा (सह शारीरिक प्रमुख) , हरिओम अग्रवाल (संपर्क प्रमुख) , आलोक अग्रवाल (कुटुंब प्रबोधन प्रमुख) और शिवांश शर्मा (स्वयंसेवक) द्वारा सुचारू रूप से संपन्न की गईं।








