




अन्नपूर्णा खाद भंडार पर कीमत को लेकर शिकायत, जय बालाजी खाद भंडार 7 दिन के लिए सील; कार्रवाई के बावजूद कारोबार जारी रहने के आरोप
पत्थलगांव, जशपुर। पत्थलगांव में खाद की बिक्री और वितरण को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों ने कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर अन्नपूर्णा खाद भंडार में खाद की कीमत और किसान से लिए गए भुगतान को लेकर मामला सामने आया है, वहीं दूसरी ओर जय बालाजी खाद भंडार के संबंध में पूर्व में की गई शिकायत और दुकान को सात दिनों के लिए सील किए जाने के बाद भी कथित रूप से कारोबार जारी रहने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
अन्नपूर्णा खाद भंडार का मामला
पत्थलगांव स्थित अन्नपूर्णा खाद भंडार को लेकर सामने आए मामले में खाद की कीमत और किसान से ली गई राशि पर सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खाद की एक बोरी पर ₹266.50 का मूल्य अंकित दिखाई देता है, जबकि एक किसान द्वारा ₹550 का ऑनलाइन भुगतान किए जाने का रिकॉर्ड सामने आया है।
ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड में प्राप्तकर्ता के रूप में Annapurna Khad Bhandar का नाम दिखाई देता है। मामले की पड़ताल के दौरान दुकान से संबंधित वीडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, जिसमें व्यापारी से खाद की कीमत और बिक्री को लेकर बातचीत की गई है।
इस पूरे मामले पर उनका बयान लेने का प्रयास किया, लेकिन व्यापारी ने बयान देने से इनकार कर दिया। इसलिए ₹550 के भुगतान, खाद की मात्रा, बिक्री दर और बिल से संबंधित व्यापारी का पक्ष फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
अब सवाल यह है कि ₹550 की राशि किस खाद और कितनी मात्रा के लिए ली गई थी? क्या इसकी विधिवत रसीद जारी की गई और क्या यह लेन-देन POS मशीन तथा बिक्री रजिस्टर में दर्ज है?
जय बालाजी खाद भंडार पर पहले भी हुई शिकायत
पत्थलगांव में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जय बालाजी खाद भंडार को लेकर पत्रकारों की ओर से लिखित शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई करते हुए दुकान को सात दिनों के लिए सील किए जाने की जानकारी सामने आई है।
लेकिन अब आरोप है कि दुकान सील होने के बाद भी व्यापारी द्वारा गोदाम से खाद का कारोबार जारी रखा जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि किसानों को खाद उपलब्ध कराने के बजाय वाहनों के माध्यम से अन्य व्यापारियों को खाद की सप्लाई की जा रही है।
यदि यह आरोप सही है तो यह गंभीर विषय है, क्योंकि सील की गई दुकान से जुड़े कारोबारी संचालन को लेकर प्रशासनिक आदेश और उसकी निगरानी पर सवाल खड़े होते हैं।
अधिकारियों की जानकारी के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहा है। आरोप है कि गोदाम से खाद की सप्लाई किए जाने की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाई गई है, इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
वहीं पहले खाद व्यापारियों से संबंधित शिकायतों में पत्रकारों और शिकायतकर्ताओं द्वारा लिखित शिकायतें दिए जाने की बात भी सामने आई है।
अब सवाल है कि शिकायतों के बाद की गई कार्रवाई का परिणाम क्या रहा?
क्या संबंधित दुकानों के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और POS रिकॉर्ड की जांच की गई?
क्या गोदाम में उपलब्ध खाद का सत्यापन किया गया?
क्या सील किए गए प्रतिष्ठान से खाद की आवाजाही की जांच की गई?
और यदि शिकायत सही पाई गई तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
किसानों को मिल रही खाद या व्यापारियों को सप्लाई?
खाद किसानों के लिए आवश्यक कृषि सामग्री है। ऐसे समय में जब किसान खरीफ सीजन की तैयारी में खाद की व्यवस्था कर रहे हैं, खाद की बिक्री और वितरण में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
अगर किसी दुकान पर कार्रवाई के बाद भी नियमों के विपरीत खाद का कारोबार जारी है, तो इससे यह सवाल उठता है कि प्रशासनिक कार्रवाई वास्तव में कितनी प्रभावी है।
वहीं अन्नपूर्णा खाद भंडार से जुड़े मामले में सामने आए ऑनलाइन भुगतान और वीडियो रिकॉर्डिंग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसान से ली गई राशि किस वस्तु और किस दर के आधार पर ली गई थी।
प्रशासन से जवाब की जरूरत
पत्थलगांव में खाद कारोबार को लेकर सामने आ रहे लगातार मामलों के बीच अब कृषि विभाग और प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
क्या जय बालाजी खाद भंडार की सीलिंग के बाद गोदाम से खाद की सप्लाई की जा रही है?
क्या इसकी जांच की गई है?
अन्नपूर्णा खाद भंडार के ₹550 के ऑनलाइन भुगतान का बिक्री रिकॉर्ड से मिलान हुआ है या नहीं?
क्या खाद की निर्धारित दर और वास्तविक बिक्री दर की जांच की जाएगी?
और सबसे महत्वपूर्ण—
पत्थलगांव में खाद की बिक्री और वितरण की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है?
उद्घोष समय न्यूज़ किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी घोषित नहीं करता। सामने आए आरोपों, वीडियो और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच तथा संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना आवश्यक है।
अब देखना यह होगा कि कृषि विभाग और प्रशासन इन मामलों में क्या कार्रवाई करता है और किसानों को खाद की बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।








