चलने-फिरने और बोलने में असमर्थ महिला की कथित रजिस्ट्री को लेकर शिकायत, सहमति से लेकर भुगतान और पंजीयन प्रक्रिया तक उठे कई सवाल
धरमजयगढ़/रायगढ़। धरमजयगढ़ विकासखंड में राजस्व एवं पंजीयन से जुड़े मामलों के बीच एक बुजुर्ग, अशक्त एवं बोलने में कठिनाई वाली महिला की जमीन की कथित रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार ग्राम बकालो, तहसील कापू निवासी रामकुंवर यादव की भूमि की रजिस्ट्री उनकी स्वतंत्र सहमति के बिना कराए जाने का आरोप है। मामले ने पंजीयन प्रक्रिया में महिला की वास्तविक सहमति, भुगतान की प्रकृति और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

1.141 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री को लेकर शिकायत
शिकायत में लगाए गए आरोप: शिकायत के अनुसार महिला के स्वामित्व वाली खसरा क्रमांक 167, 172, 174, 285/2, 285/3, 295/3, 297/17 एवं 297/19, कुल रकबा 1.141 हेक्टेयर भूमि की कथित रूप से उनकी स्वतंत्र सहमति के बिना रजिस्ट्री करा दी गई। आरोप है कि 24 अगस्त 2026 को सावित्री, परमेश्वर पिता किरीतराम निवासी पेलमा तथा आनंद जांगड़े निवासी कापू महिला को कार से धरमजयगढ़ लेकर आए।
ब्रजेश्वरी गुप्ता के नाम रजिस्ट्री का दावा
भूमि हस्तांतरण को लेकर आरोप: शिकायत में बताया गया है कि इसके बाद उक्त भूमि की रजिस्ट्री ब्रजेश्वरी गुप्ता पति जयनंद गुप्ता, निवासी नवापारा-बनोरा, रायगढ़ के नाम किए जाने की बात सामने आई। हालांकि शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
चेक दर्ज, लेकिन नकद भुगतान का दावा क्यों?
भुगतान को लेकर सबसे बड़ा सवाल: मामले में भुगतान की प्रकृति को लेकर विरोधाभासी बातें सामने आई हैं। शिकायत के अनुसार रजिस्ट्री दस्तावेज में आईसीआईसीआई बैंक, धरमजयगढ़ का चेक क्रमांक 000875 दर्ज है। वहीं महिला के कथित बयान में जमीन के बदले दो लाख रुपये नकद दिए जाने की बात कही गई है।
दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड की जांच जरूरी: यदि भुगतान चेक से हुआ था तो महिला के बैंक खाते में संबंधित राशि जमा होने का प्रमाण क्या है? यदि भुगतान नकद हुआ था तो रजिस्ट्री दस्तावेज में चेक का उल्लेख क्यों किया गया? शिकायत में यह भी कहा गया है कि रजिस्ट्री दस्तावेजों में चेक की फोटोकॉपी उपलब्ध नहीं है। इन सवालों का जवाब मूल रजिस्ट्री दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, चेक संबंधी जानकारी और संबंधित पक्षों के बयान की जांच से ही सामने आ सकता है।
गोद में उठाकर स्टूल पर बैठाने का आरोप
पंजीयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल: शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महिला चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण परमेश्वर यादव ने उसे कथित रूप से गोद में उठाकर उप पंजीयक कार्यालय में स्टूल पर बैठाया। इसके बाद राहुल टंडन नामक व्यक्ति द्वारा महिला से जमीन बेचने के संबंध में सहमति देने के लिए कहे जाने का भी आरोप लगाया गया है।
सहमति की वास्तविकता जांच का अहम बिंदु: यदि शिकायत में वर्णित घटनाक्रम सही पाया जाता है तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा कि पंजीयन के समय महिला की पहचान, उसकी समझ, शारीरिक स्थिति और स्वतंत्र सहमति का किस प्रकार सत्यापन किया गया था।
दो लाख रुपये नकद दिए जाने के आरोप से नया सवाल
नकद राशि को लेकर भी जांच की मांग: शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल टंडन के साथी बताए जा रहे सौरभ सिंह द्वारा कथित रूप से दो लाख रुपये नकद महिला को दिए गए। आरोप के अनुसार महिला ने कुछ समय तक राशि अपने पास रखी, जिसके बाद वहां मौजूद सावित्रीबाई द्वारा राशि ले ली गई।
सौरभ सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में: ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक होगा कि कथित नकद राशि किसने दी, भुगतान का वास्तविक स्वरूप क्या था और पंजीयन प्रक्रिया के दौरान इस लेन-देन की जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी या नहीं।
उप पंजीयक की मौजूदगी को लेकर भी उठे सवाल
निगरानी और सत्यापन पर सवाल: शिकायतकर्ता का कहना है कि पूरा घटनाक्रम तत्कालीन उप पंजीयक पूनम सिदार की मौजूदगी में हुआ। ऐसे में Dharamjaigarh Land Registry मामले में यह भी जांच का विषय बन सकता है कि पंजीयन के दौरान महिला की सहमति और भुगतान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
सीसीटीवी और दस्तावेज बन सकते हैं अहम साक्ष्य: मामले की निष्पक्ष जांच में उप पंजीयक कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज, मूल पंजीयन दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन्हीं साक्ष्यों से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
बिचौलियों की भूमिका पर भी उठते रहे हैं सवाल
स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर: धरमजयगढ़ क्षेत्र में जमीन संबंधी मामलों में कथित बिचौलियों एवं दलालों की भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों द्वारा राजस्व न्यायालयों और उप पंजीयक कार्यालयों में जमीन संबंधी काम कराने वाले कथित बिचौलियों की सक्रियता को लेकर भी आरोप लगाए जाते रहे हैं।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी: हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा Dharamjaigarh Land Registry विवाद ने पंजीयन व्यवस्था की पारदर्शिता और आम नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
शिकायतों की कड़ी ने भी बढ़ाई मामले की गंभीरता
राहुल टंडन को लेकर भी शिकायतों का उल्लेख: शिकायत से जुड़े विवरण में राहुल टंडन के खिलाफ पूर्व में शिकायतें किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि पूर्व प्रभारी उप-पंजीयक उनमेश पटेल द्वारा दस्तावेजों में आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं पूर्ण नहीं होने के कारण रजिस्ट्री से इनकार किए जाने के बाद भी शिकायत किए जाने की बात सामने आई थी।
अन्य शिकायतों का भी जिक्र: हाल ही में कापू थाना क्षेत्र में जातिसूचक शब्दों के कथित प्रयोग को लेकर शिकायत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि इन शिकायतों के वास्तविक कारण और आरोपों की सत्यता संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब दस्तावेजी जांच से खुलेगा पूरा सच
कई सवालों के जवाब जांच पर निर्भर: मामले को लेकर स्थानीय स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायत में सावित्री, परमेश्वर, आनंद जांगड़े और राहुल टंडन सहित अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
जांच में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस: क्या महिला ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से जमीन बेची थी? क्या पंजीयन से पहले उसकी सहमति और स्थिति का पर्याप्त सत्यापन हुआ था? रजिस्ट्री में दर्ज चेक का भुगतान वास्तव में हुआ या नहीं? दो लाख रुपये नकद दिए जाने के आरोप में कितनी सच्चाई है? चेक की प्रति दस्तावेजों में क्यों नहीं है? और यदि पूरा घटनाक्रम पंजीयन अधिकारी के समक्ष हुआ तो प्रक्रिया के दौरान आवश्यक सत्यापन किस आधार पर किया गया?
जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी: फिलहाल इन सवालों का उत्तर आरोपों या चर्चाओं से नहीं, बल्कि मूल पंजीयन दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पक्षों के बयानों की निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, यह सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।






