INDIA ब्लॉक के नेताओं ने निकाला मार्च, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए आरोप; बीजेपी ने विपक्ष के विरोध पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर टकराव देखने को मिला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए विरोध मार्च निकाला। विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया।
सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़े विपक्षी सांसद
प्राप्त विवरण के मुताबिक, विपक्षी नेताओं ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। रास्ते में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। विपक्षी नेताओं का कहना है कि SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
इसी मुद्दे पर INDIA ब्लॉक से जुड़ी 10 पार्टियों के 11 नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, याचिका में उठाए गए सटीक मुद्दों और अदालत की कार्यवाही की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
राहुल गांधी बोले—‘यह शिवजी की बारात है’
मार्च से पहले राहुल गांधी ने विपक्षी प्रदर्शन को ‘शिवजी की बारात’ बताते हुए कहा कि इसमें कोई भी शामिल हो सकता है। उनके इस बयान को विपक्ष की एकजुटता और आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी की।
बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों पर उठाए सवाल
विपक्ष के मार्च और राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। विपक्ष के ‘शिवजी की बारात’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए सत्तापक्ष की ओर से प्रदर्शन को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की गई।
बीजेपी का पक्ष है कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों को अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने चाहिए। इस तरह SIR का मुद्दा एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
SIR पर उठे सवालों का जवाब अदालत में मिलेगा?
विपक्ष के विरोध के बीच अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर अदालत क्या रुख अपनाती है और क्या इससे SIR प्रक्रिया में किसी बदलाव की स्थिति बनती है।
फिलहाल, विपक्ष ने अपने आंदोलन को जारी रखने का संकेत दिया है। वहीं, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों पर आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।











