मारपीट की शिकायत में ₹5,000 और सोने की चेन छीनने का भी लगाया था आरोप; रिपोर्टकर्ता ने शपथ पत्र देकर लूटपाट की बात बढ़ा-चढ़ाकर बताने की बात स्वीकार की
रायगढ़। जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में मारपीट की घटना को लूटपाट का रूप देकर रिपोर्ट दर्ज कराने का मामला सामने आया है। पुलिस की विवेचना में लूटपाट की पुष्टि नहीं होने के बाद प्रकरण से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 309(6) हटा दी गई है। वहीं, रिपोर्टकर्ता के विरुद्ध संभावित वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस ने न्यायालय में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेशानुसार होगी।
₹5,000 और सोने की चेन छीनने की दर्ज कराई थी शिकायत
पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 को कोतरारोड़ क्षेत्र की जयसिंह गली निवासी संजय दास (22 वर्ष) ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि 9 अक्टूबर की रात करीब 12:30 बजे रेलवे बंगला स्थित जगन्नाथ मंदिर के पास सागर यादव, शैलेश साहू और भोला नामक युवकों ने उसके साथ मारपीट की तथा ₹5,000 नकद और सोने की चेन छीन ली।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 583/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 296, 315(3), 351(3), 309(6) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।
पूछताछ में लूटपाट की पुष्टि नहीं होने का दावा
मामले की जांच थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक अमित तिवारी द्वारा की गई। पुलिस ने रिपोर्टकर्ता और गवाहों से पूछताछ कर घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की। पुलिस के मुताबिक, विवेचना में मारपीट की घटना सामने आई, लेकिन लूटपाट की पुष्टि नहीं हुई।
पुलिस का कहना है कि लूटपाट के संबंध में विस्तृत पूछताछ के दौरान रिपोर्टकर्ता ने पूर्व रंजिश के चलते आरोपियों को फंसाने के उद्देश्य से लूटपाट की बात बढ़ा-चढ़ाकर दर्ज कराने की बात स्वीकार की। इस संबंध में उसके द्वारा शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया गया है।
लूट की धारा हटाई, न्यायालय के आदेश पर होगी आगे की कार्रवाई
विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने प्रकरण से BNS की धारा 309(6) हटा दी है। साथ ही, रिपोर्टकर्ता के विरुद्ध संभावित वैधानिक कार्रवाई के लिए न्यायालय को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जा रहा है। उसके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी, यह न्यायालय के आदेश के अनुसार तय किया जाएगा।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने दी चेतावनी
रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि किसी निर्दोष व्यक्ति को फंसाने के उद्देश्य से झूठी लूटपाट की रिपोर्ट दर्ज कराना कानून का दुरुपयोग है। ऐसे मामलों में पुलिस निष्पक्ष विवेचना के जरिए सच्चाई सामने लाएगी और झूठी शिकायत करने वालों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई के लिए न्यायालय को प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि पुलिस को सही जानकारी दें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। कानून का सहारा लें, उसका दुरुपयोग न करें।











