Dussehra 2026: 20 अक्टूबर को मनाया जा रहा विजयादशमी का पर्व, शाम 5:47 बजे से रात 8:23 बजे तक रावण दहन के लिए बताया गया प्रदोष काल
नई दिल्ली। देशभर में आज, मंगलवार 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। शारदीय नवरात्रि के दौरान विभिन्न स्थानों पर रामलीला का मंचन किया जाता है और दशहरे के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण तथा मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।
दशहरा के दिन रावण दहन के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं दशहरा की तिथि, रावण दहन का शुभ समय और इस पर्व का धार्मिक महत्व।
दशहरा 2026: रावण दहन का शुभ मुहूर्त
दशहरा के अवसर पर रावण दहन सामान्यतः शाम के प्रदोष काल में किया जाता है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, आज रावण दहन के लिए शाम 5 बजकर 47 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक का समय बताया गया है।
- दिन: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
- रावण दहन का समय: शाम 5:47 बजे से रात 8:23 बजे तक
- पर्व: विजयादशमी (दशहरा)
ध्यान दें कि शुभ मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग की गणना के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। अपने शहर के सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग या आयोजन समिति की सूचना देखें।
दशमी तिथि कब से कब तक?
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होकर 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी।
प्रदोष काल में दशमी तिथि के महत्व को ध्यान में रखते हुए 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाने की बात कही गई है।
दशहरा क्यों मनाया जाता है?
दशहरा या विजयादशमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी दिन लंकापति रावण का वध किया था। इस घटना को सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर विजय के रूप में देखा जाता है।
देश के कई हिस्सों में यह पर्व मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध किए जाने की मान्यता से भी जुड़ा है। इसलिए विजयादशमी को शक्ति, साहस और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।
रावण दहन का क्या है महत्व?
दशहरा पर रावण के पुतले का दहन बुराई, अहंकार, अन्याय और नकारात्मकता के अंत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व संदेश देता है कि व्यक्ति को अपने भीतर की बुराइयों को त्यागकर सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
इस दिन देशभर में रामलीला के समापन के बाद रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन भी होते हैं।
विजयादशमी का संदेश
दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में अच्छे विचारों, सत्य और नैतिकता को अपनाने की प्रेरणा भी देता है। यह पर्व याद दिलाता है कि अहंकार और अन्याय चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।











