spot_img
Saturday, February 14, 2026
Saturday, February 14, 2026
WhatsApp Image 2025-09-27 at 19.02.00_2560a816
WhatsApp Image 2025-09-27 at 19.02.00_8a3c1831

बड़ी खबर ~ लैलूँगा नहर लाइनिंग में भ्रष्टाचार की नहर, बाल मजदूरी से सनी निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

लैलूंगा नहर लाइनिंग में भ्रष्टाचार की नहर, बाल मजदूरी से सनी निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

लैलूंगा, /छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा ब्लॉक में चल रही नहर लाइनिंग परियोजना इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां एक ओर करोड़ों रुपये की लागत से सिंचाई सुविधा को बेहतर बनाने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस निर्माण कार्य में गहरे भ्रष्टाचार और अमानवीय बाल मजदूरी जैसे संगीन आरोप सामने आ रहे हैं।

बाल मजदूरी: विकास के नाम पर बचपन से खिलवाड़

लैलूंगा क्षेत्र में हो रहे इस नहर लाइनिंग कार्य में नाबालिग बच्चों को मजदूरी कराते हुए देखा गया है। यह न केवल भारतीय श्रम कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि राज्य सरकार की उन कोशिशों पर भी तमाचा है, जिनके तहत छत्तीसगढ़ में बाल श्रमिकों को रोकने के लिए विशेष विभाग और संस्थाएं बनाई गई हैं। बाल कल्याण समिति, जिला प्रशासन और श्रम विभाग की मौजूदगी के बावजूद बच्चों से मिट्टी उठवाना, गिट्टी बिछवाना ,सीमेंट का मसाला बनवाना और अन्य भारी कार्य कराना चौंकाने वाला है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, निर्माण स्थल पर रोजाना कई बच्चे कम मजदूरी में काम करते देखे जाते हैं। इन बच्चों की उम्र 15 से 17 वर्ष के बीच बताई जाती है। न तो इनके पास किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था होती है, और न ही स्वास्थ्य संबंधी किसी सुविधा का इंतजाम।

पेटी कांट्रेक्ट सिस्टम बना भ्रष्टाचार का जरिया

सूत्रों के अनुसार, यह नहर लाइनिंग परियोजना लगभग 2 किलोमीटर लंबी है, जिसे टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से धरमजयगढ़ निवासी राजकुमार मिश्रा को आवंटित किया गया। लेकिन मिश्रा ने इस कार्य को आगे पेटी कांट्रेक्ट पर दया दास महंत को सौंप दिया। दया दास महंत पर इससे पहले भी निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री इस्तेमाल करने के आरोप लग चुके हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि महंत द्वारा किए जा रहे निर्माण में भारी अनियमितता है। सीमेंट की मात्रा कम, बालू और गिट्टी की गुणवत्ता खराब तथा लाइनिंग की मोटाई तय मानकों से काफी कम बताई जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत संबंधित विभाग को की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।

स्थानीय प्रशासन और इंजीनियर की भूमिका पर सवाल

परियोजना की निगरानी के लिए नियुक्त इंजीनियर का रवैया भी संदिग्ध बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि इंजीनियर न तो लैलूंगा में निवास करते हैं, और न ही फोन कॉल उठाते हैं। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता पर निगरानी का प्रश्न ही नहीं उठता।

एक ग्रामीण ने बताया, “हमने कई बार काम की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इंजीनियर साहब का तो चेहरा भी किसी ने महीनों से नहीं देखा।”

सरकारी योजनाएं और जमीनी हकीकत में बड़ा फासला

छत्तीसगढ़ सरकार बाल मजदूरी रोकने के लिए ‘बाल श्रमिक प्रतिबंधन अधिनियम’, ‘राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना’ जैसी योजनाएं चला रही है। इसके अलावा ‘चाइल्ड लाइन’, ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ जैसे गैर-सरकारी संगठन भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। बावजूद इसके सरकारी योजनाओं की जमीनी सच्चाई लैलूंगा की इस नहर परियोजना में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

विकास के नाम पर बच्चों के बचपन को दांव पर लगाना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह देश के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है। इसके पीछे सीधे तौर पर जिम्मेदार सरकारी महकमा और पेटी कांट्रैक्टर की मिलीभगत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मांग उठी: जांच हो और दोषियों पर हो कार्यवाही

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। बाल मजदूरी कराने वाले पेटी कांट्रेक्टर दया दास महंत के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो और टेंडर देने वाले ठेकेदार राजकुमार मिश्रा की भूमिका भी जांची जाए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि निर्माण स्थल पर निगरानी बढ़ाई जाए और वहां बच्चों की उपस्थिति को रोकने के लिए विशेष टीमें बनाई जाएं। साथ ही, निर्माण कार्य में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र तकनीकी जांच करवाई जाए।

निष्कर्ष: विकास की आड़ में जिम्मेदारियों से पलायन

लैलूंगा नहर लाइनिंग कार्य भ्रष्टाचार, लापरवाही और शोषण की मिसाल बन चुका है। जिस नहर से किसानों की जिंदगी को संजीवनी मिलने की उम्मीद थी, वह आज बच्चों के खून-पसीने से लथपथ हो रही है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो इसका असर न केवल परियोजना की गुणवत्ता पर पड़ेगा, बल्कि समाज में बाल श्रमिकों को लेकर बनी लड़ाई को भी पीछे धकेल देगा।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है—चुप्पी साधे रहता है या वास्तव में दोषियों को सजा दिलाकर एक उदाहरण पेश करता है।

01
09
WhatsApp Image 2025-09-29 at 18.52.16_7b78a71e
spot_img
spot_img

अपना न्यूज़ पोर्टल - 9340765733

spot_img
spot_img
spot_img

Recent Posts

पुरानी बस्ती खरसिया में मारपीट की घटना पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई — हत्या के प्रयास अपराध में तीन आरोपी गिरफ्तारपुरानी रंजिश को लेकर...

रिपोर्ट ~ हीरालाल राठिया लैलूंगा पुरानी बस्ती खरसिया में मारपीट की घटना पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई — हत्या के प्रयास अपराध में तीन...
Latest
पुरानी बस्ती खरसिया में मारपीट की घटना पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई — हत्या के प्... रायगढ़ पुलिस का बड़ा खुलासा — फर्जी नंबर प्लेट लगाकर धान परिवहन करने वाला ट्रक मा... लैलूँगा : बनेकेला तालाब की ताबड़तोड़ सफाई! सरपंच खुशबू पैंकरा की पहल से चमका गां... 🕉️ महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर स्पेशल ऑफर – बजाज बाइकों  में महाधमाका! 🏍️<... कुर्रूभाठा में धूमधाम से मना दृष्टि एवं प्रवीण बंजारा का बर्थडे, जनप्रतिनिधियों ... ऑपरेशन मुस्कान में रायगढ़ पुलिस को बड़ी सफलता — झांसी (उ.प्र.) से लापता बालिका बर... खरसिया के हमालपारा में उठाईगिरी का खुलासा — 24 घंटे के भीतर दो चोर गिरफ्तार, नगद... लैलूँगा में दिव्यांगजन एवं वृद्धजनों के लिए विशेष शिविर आयोजित, सैकड़ों हितग्राहि... रेलवे स्टेशन के बाहर मारपीट की घटना के चंद घंटे के भीतर चार आरोपी गिरफ्तार — कोत... तमनार जल समूह का कलेक्टर ने किया निरीक्षण, कार्यों में प्रगति लाने के दिए निर्दे...