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Saturday, February 14, 2026
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सरकारी ज़मीन पर बेधड़क कब्ज़ा: कुंजारा में भू-माफिया ने खड़ी कर दी प्राइवेट कॉलेज की इमारत

राजस्व रिकॉर्ड में जंगल, ज़मीन पर कॉलेज!

प्रशासन मौन, अतिक्रमणकारी बेलगाम

लैलूंगा के नज़दीक कुंजारा बना अवैध निर्माण का हॉटस्पॉट

सरकारी ज़मीन पर बेधड़क कब्ज़ा: कुंजारा में भू-माफिया ने खड़ी कर दी प्राइवेट कॉलेज की इमारत

राजस्व रिकॉर्ड में जंगल, ज़मीन पर कॉलेज!

प्रशासन मौन, अतिक्रमणकारी बेलगाम

लैलूंगा के नज़दीक कुंजारा बना अवैध निर्माण का हॉटस्पॉट

लैलूंगा (रायगढ़)।
जिले के लैलूंगा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंजारा में शासकीय भूमि पर अवैध कब्ज़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार केवल झोपड़ी या टीनशेड नहीं, बल्कि बाकायदा एक कोचिंग सेंटर और प्राइवेट कॉलेज की इमारत खड़ी कर दी गई है – वो भी ऐसी ज़मीन पर जो राजस्व रिकॉर्ड में ‘बड़े झाड़-जंगल मद’ के अंतर्गत दर्ज है।

यह पूरा मामला पटवारी हल्का नंबर 20, राजस्व निरीक्षक मंडल लैलूंगा, तहसील लैलूंगा, जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़) के अंतर्गत आता है।

खास बात यह है कि यह भूमि खसरा नंबर 243/1, कुल रकबा 4.327 हेक्टेयर की है, जिसमें से करीब 0.202 हेक्टेयर भूमि पर अवैध निर्माण कर लिया गया है।

हलवाई से भू-माफिया तक: ‘शिक्षा’ के नाम पर कब्ज़ा

इस पूरे मामले में आशीष कुमार सिदार, पिता शिवा सिदार, निवासी लैलूंगा को अतिक्रमणकर्ता के रूप में नामित किया गया है। पेशे से हलवाई रहे आशीष सिदार ने इस शासकीय भूमि पर छलपूर्वक कब्ज़ा करते हुए एक स्थायी भवन का निर्माण कर लिया है।

सूत्रों के अनुसार, इस भवन में कोचिंग सेंटर और एक प्राइवेट कॉलेज संचालित किया जा रहा है, जो पूर्णतः व्यवसायिक उद्देश्य के लिए उपयोग हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास स्थित उद्यान मार्ग पर खुलेआम हो रहा है।

शासकीय उपयोग के लिए आरक्षित भूमि पर धड़ल्ले से कारोबार

इस भूमि को शासकीय प्रयोजन हेतु आरक्षित रखा गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि यहां किसी भी तरह की निजी या व्यवसायिक गतिविधि कानूनन वर्जित है। ऐसे में इस प्रकार का निर्माण राजस्व एवं भू-अधिकार कानूनों का खुला उल्लंघन है।

विधि विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल मद की भूमि पर इस तरह के निर्माण को राजस्व संहिता की धारा 188, 251, एवं 257 के तहत अवैध घोषित किया जा सकता है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

गौरतलब है कि इस अवैध कब्ज़े की जानकारी स्थानीय राजस्व अधिकारियों, पटवारी, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, और तहसील प्रशासन को पूर्व से है। बावजूद इसके, अब तक न तो कोई कार्रवाई की गई है, न ही अतिक्रमण हटाने की कोई पहल दिखी है।

स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि जब एक आम व्यक्ति झोपड़ी बना लेता है, तो प्रशासन तुरंत नोटिस और बुलडोजर लेकर पहुँच जाता है, लेकिन जब मामला प्रभावशाली या पैसे वाले व्यक्ति का होता है, तो प्रशासन खामोश रहता है।


पंचायत योजनाओं पर संकट

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने यह आशंका भी जताई है कि इस तरह के अतिक्रमण से भविष्य में ग्राम पंचायत को किसी भी विकास कार्य, स्कूल, अस्पताल या अन्य शासकीय परियोजनाओं के लिए भूमि प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

यह न केवल स्थानीय शासन की योजनाओं में बाधा उत्पन्न करेगा, बल्कि ग्रामीणों के हितों को भी दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाएगा।


क्या है प्रशासन का अगला कदम?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है?

क्या यह मामला राजस्व विभाग और तहसील प्रशासन की मिलीभगत का नतीजा है? या फिर यह निगरानी तंत्र की विफलता का उदाहरण?

स्थानीय नागरिकों की मांग है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण कैसे संभव हुआ। साथ ही दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही कर भूमि को शीघ्र कब्जा मुक्त कराया जाए।


भू-माफियाओं की बेलगाम ताक़त का प्रतीक बनता कुंजारा

कुंजारा अब एक सामान्य गांव नहीं, बल्कि भू-माफियाओं की ताक़त और प्रशासनिक निष्क्रियता का उदाहरण बनता जा रहा है।

जहां ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, वहीं कुछ लोग नियम-कानून ताक पर रखकर सरकारी ज़मीन पर व्यापारिक साम्राज्य खड़ा कर रहे हैं।

जनता की चेतावनी: अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो होगा आंदोलन

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर इस अतिक्रमण को प्रशासन द्वारा शीघ्र नहीं हटाया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। यह आंदोलन केवल इस एक भूमि को लेकर नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम की जवाबदेही तय करने के लिए होगा।

निष्कर्ष: अवैध कब्ज़े के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई समय की मांग

कुंजारा में शासकीय भूमि पर अवैध रूप से खड़े इस कोचिंग और कॉलेज की इमारत सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने की एक चाल है।

अब वक्त आ गया है कि शासन-प्रशासन अपनी नींद से जागे, और ऐसी गतिविधियों पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई कर जनता के बीच विश्वास की पुनर्स्थापना करे।

अन्यथा भू-माफिया की यह मनमानी, आने वाले वर्षों में शासन व्यवस्था को खोखला कर देगी।

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