लैलूंगा में राधाअष्टमी का महापर्व, भक्तों में उमंग और आस्था का सैलाब
लैलूंगा। धर्म नगरी लैलूंगा एक बार फिर भक्ति रस में सराबोर होने जा रही है। जन्माष्टमी के ऐतिहासिक उत्सव के बाद अब नगरवासी और क्षेत्र के श्रद्धालु 31 अगस्त रविवार को राधाअष्टमी के पर्व का साक्षी बनेंगे। लैलूंगा के सुप्रसिद्ध राधा कृष्ण मंदिर में इस महापर्व की तैयारियाँ जोरों पर हैं और पूरे नगर में धार्मिक माहौल देखने को मिल रहा है।
हाल ही में जन्माष्टमी पर जिस तरह हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रभु के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया, उसी भक्ति श्रृंखला में अब राधाअष्टमी का पर्व और भी भव्य तरीके से मनाया जाएगा। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर को फूलों और झालरों से सजाया गया था, प्रभु का विशेष श्रृंगार कर भक्तों ने रंग-बिरंगी रोशनी और भजन संध्या के बीच झूमकर दर्शन किए थे। इसके बाद प्रभु की छठी के अवसर पर भी विशाल भजन संध्या हुई, जहाँ भक्तों ने फलों से सजे श्रृंगार का आनंद लिया और देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे।
मंदिर के पुजारी गोपाल महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि राधाअष्टमी पर्व इस बार नगरवासियों के लिए विशेष रहेगा। उन्होंने कहा— “31 अगस्त दिन रविवार को दोपहर 3:30 बजे से मंदिर प्रांगण में भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात राधा रानी का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा और राधा रानी की महाआरती कर भक्तों को प्रसाद वितरण किया जाएगा।”
भक्तों की उमंग का आलम यह है कि अभी से ही मंदिर प्रांगण और आसपास के क्षेत्रों को सजाने का काम शुरू हो गया है। फूल, झालर और रंगीन लाइटों से सजे मंदिर का दृश्य भक्तों के मन को मोह लेगा। स्थानीय कलाकारों और भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले मधुर भजन श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर करेंगे।
पुजारी ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे परिवार सहित अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस महापर्व का हिस्सा बनें और राधा रानी की कृपा प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि “राधा जी का जन्मोत्सव प्रेम, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन की पूजा-अर्चना करने से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का संचार होता है।”
लैलूंगा नगर की जनता जन्माष्टमी की तरह ही राधाअष्टमी पर भी भारी संख्या में जुटने को उत्साहित है। नगर के व्यापारी वर्ग, सामाजिक संगठन और युवा मंडल भी इस आयोजन को सफल बनाने में जुट गए हैं। अनुमान है कि राधाअष्टमी के दिन न केवल लैलूंगा बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचल से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचेंगे।
भक्तों में इस बात को लेकर विशेष उत्साह है कि इस बार मंदिर का श्रृंगार राधा-कृष्ण प्रेमलीला की झलकियों पर आधारित होगा, जिससे श्रद्धालु आध्यात्मिक अनुभव का आनंद ले सकें। शाम को जब राधा रानी की आरती होगी तो मंदिर प्रांगण में शंख, घंटा और जयकारों की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय हो जाएगा।
निस्संदेह, 31 अगस्त को लैलूंगा धर्मनगरी में राधाअष्टमी का पर्व एक अद्वितीय और अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव देने जा रहा है। यह आयोजन न केवल श्रद्धालुओं को भक्ति में डुबोएगा बल्कि नगर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी और सशक्त बनाएगा।
भक्ति, उत्साह और आस्था का संगम—31 अगस्त को लैलूंगा में राधाअष्टमी बनेगी श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य पर्व।








