बस्तर जिले में ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता और प्रभावशीलता परखने के लिए चलाए गए सामाजिक अंकेक्षण अभियान का कार्य पूरा हो गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिले की 433 ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और प्रधानमंत्री आवास योजना का व्यापक सामाजिक अंकेक्षण किया गया।
इस प्रक्रिया में न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा हुई, बल्कि ग्रामीणों को सीधे अपनी शिकायतें, सुझाव और आपत्तियां रखने का अवसर भी मिला। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की इस पहल का उद्देश्य योजनाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनभागीदारी आधारित बनाना था। इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम सभाओं का आयोजन कर योजनाओं से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की गई। ग्रामीणों के सामने कार्यों की स्थिति, खर्च और लाभार्थियों से जुड़ी जानकारियां रखी गईं, जिससे लोगों को योजनाओं की वास्तविक स्थिति समझने का मौका मिला।
जिला प्रशासन का मानना है कि सामाजिक अंकेक्षण से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ी है और ग्रामीणों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। पूरे अभियान को सफल बनाने में जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अब प्रशासन की नजर अंकेक्षण में सामने आए मामलों के निराकरण और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर है, ताकि ग्रामीण विकास की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
अंकेक्षण के दौरान सामने आए ये महत्वपूर्ण मुद्दे सामाजिक अंकेक्षण के दौरान मनरेगा के तहत रोजगार की उपलब्धता, समय पर मजदूरी भुगतान और कार्यों की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने अपनी बात रखी। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना में अधूरे मकानों को जल्द पूरा करने की मांग भी प्रमुखता से उठी। प्रशासन ने इन सभी बिंदुओं पर कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सामाजिक अंकेक्षण केवल जांच प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच संवाद का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।
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