40 करोड़ की सड़क फाइलों में कैद! कोतबा–बागबहार मार्ग पर मौत का सफर, आंदोलन की चेतावनी
’40 करोड़ कहाँ गए?’ कोतबा–बागबहार मार्ग बना दलदल, 9 महीने बाद भी निर्माण शुरू नहीं
विकास के दावे ध्वस्त! 40 करोड़ की स्वीकृति के बाद भी कोतबा–बागबहार मार्ग बना हादसों का अड्डा
करोड़ों मंजूर, सड़क लापता! कोतबा–बागबहार मार्ग पर गड्ढे, कीचड़ और जनता का फूटा गुस्सा
40 करोड़ की परियोजना पर सवाल! कोतबा–बागबहार मार्ग बना ‘मौत का रास्ता’, ग्रामीण बोले– अब होगा आंदोलन
9 महीने… 40 करोड़… फिर भी नहीं बनी सड़क! कोतबा–बागबहार मार्ग पर हर सफर जानलेवा
कोतबा–बागबहार मार्ग की बदहाली पर बवाल! 40 करोड़ की स्वीकृति के बाद भी सड़क बनी दलदल, जनता ने दी आंदोलन की चेतावनी
40 करोड़ की स्वीकृति, फिर भी सड़क नहीं! कोतबा–बागबहार मार्ग बना ‘मौत का दलदल’, जनता बोली– अब आर-पार की लड़ाई!

कोतबा से प्रवीण कुमार शर्मा की विशेष रिपोर्ट
कोतबा। विकास के बड़े-बड़े दावों और करोड़ों की स्वीकृतियों के बीच कोतबा–बागबहार मार्ग की बदहाली ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और निर्माण एजेंसी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 13 किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण मार्ग के निर्माण के लिए लगभग 40 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिले 9 महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। मानसून की पहली ही बारिश ने सड़क की असल तस्वीर सामने ला दी है। जगह-जगह बने बड़े गड्ढे, घुटनों तक कीचड़ और उखड़ी सड़क ने लोगों का सफर खतरे से भर दिया है।
यह सड़क केवल कोतबा और बागबहार को ही नहीं जोड़ती, बल्कि रायगढ़, जशपुर, ओड़िशा और झारखंड की ओर जाने वाले हजारों लोगों और भारी वाहनों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्ग है। प्रतिदिन सवारी बसें, मालवाहक ट्रक, एंबुलेंस, स्कूली वाहन और दोपहिया चालक इसी सड़क से गुजरते हैं। लेकिन वर्तमान हालात ऐसे हैं कि वाहन चालक जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर सड़क दलदल में तब्दील हो चुकी है, जिससे फिसलकर दुर्घटना होने का खतरा लगातार बना हुआ है।
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि विभाग ने सड़क की मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की है। गड्ढों को भरने के लिए सड़क किनारे की मिट्टी और निम्न गुणवत्ता वाली 40 एमएम गिट्टी डाल दी गई, जो पहली बारिश में ही बह गई। इससे सड़क पहले से अधिक खतरनाक हो गई है। लोगों का कहना है कि करोड़ों की स्वीकृति के बावजूद निर्माण शुरू नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता और ठेकेदार की लापरवाही को दर्शाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ महीने पहले विभाग ने निर्माण में देरी का कारण डीजल की कमी और ईंधन की बढ़ी कीमतों को बताया था। लेकिन अब जब ऐसी कोई समस्या नहीं है, तब भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। इससे लोगों में भारी नाराजगी है और वे विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
इस मामले में जब लोक निर्माण विभाग के एसडीओ संतोष पैंकरा से दूरभाष पर पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। विभाग के इस रवैये से लोगों में और अधिक नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जब अधिकारी जनता की शिकायत सुनने तक को तैयार नहीं हैं, तो समस्या का समाधान कैसे होगा?
हालांकि, पत्थलगांव के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ऋतुराज बिसेन ने सड़क की स्थिति को गंभीर मानते हुए कहा कि यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि आगामी मंगलवार को आयोजित टीएल बैठक में जिला कलेक्टर रोहित व्यास के समक्ष इस समस्या को रखा जाएगा और शीघ्र समाधान के लिए आवश्यक पहल की जाएगी।
कोतबा के पार्षद पंकज शर्मा सहित स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पंचायत कोतबा वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहा है। गर्मियों में धूल और बरसात में कीचड़ लोगों की नियति बन चुकी है। करोड़ों की स्वीकृति मिलने के बाद भी यदि जनता को राहत नहीं मिलती, तो यह विकास योजनाओं की हकीकत को उजागर करता है।
अब क्षेत्रवासियों का धैर्य जवाब देने लगा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ और आवागमन लायक व्यवस्था नहीं की गई, तो वे उग्र जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 40 करोड़ की यह परियोजना वास्तव में धरातल पर उतर पाएगी, या फिर यह भी सरकारी फाइलों और कागजों तक ही सीमित रह जाएगी? जनता अब वादों नहीं, सड़क पर काम होते देखना चाहती है।








