सुकमा में दिव्यांग बच्चों ने पेश की जिंदादिली की मिसाल….

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सुकमा में दिव्यांग बच्चों ने पेश की जिंदादिली की मिसाल

मैदान पर खेल कूद में जोश, कलात्मकता का दिया परिचय

सुकमा– पूरे विश्व में हर साल तीन दिसम्बर को विश्व दिव्यांगता दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। इस अवसर पर जिला मुख्यालय के कुम्हाररास स्थित आकार आवासीय संस्था में दो दिवसीय खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा हैं। इसके तहत् आज आकार संस्था के खेल मैदान में खेलकूद और बौधिक क्षमता की गतिविधियाँ हुई, इसके पश्चात रंगोली एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। जिसमें इन दिव्यांग बच्चों ने अद्वितीय खेल कौशल का प्रदर्शन किया। उनमें शारिरिक या मानसिक दिव्यांगता जरुर है, लेकिन जीवन जीने का उमंग उनमें किसी भी सामान्य व्यक्ति से कई गुना अधिक है। वे इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि कोई भी व्यक्ति कमजोर नही होता, सभी अपने आप में विशेष हैं।आकार संस्था के क्रीड़ा स्थल में खेलकूद कार्यक्रमों की शुरूआत दौड़ से हुई। दौड़ के साथ ही मटकी फोड़, चम्मच दौड़, कुर्सी दौड़, जलेबी दौड़, बॉस्केटबॉल, मिश्रित मोती जैसे शारिरिक एवं बौधिक क्षमता वाले खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिमसें बालक-बालिकाओं ने बड़े ही उत्साह के साथ प्रतियोगिता में भाग लेकर खेल प्रतिभा का परिचय दिया। मटकी फोड़ प्रतियोगिता में नेत्र बाधित प्रतिभागियों ने एक बार में मटकी फोड़ी, यह देख वहाँ उपस्थित सभी दर्शक एवं अन्य प्रतिभागी अचंभित रह गए।

बच्चों ने बनाई कागज, बोतल, अन्य वस्तुओं से कलाकृतियां

आकार संस्था के बच्चों द्वारा बनाई गई मनमोहक कलाकृतियां किसी मास्टरपीस से कम नही थीं। किसी ने खाली बोतल को जोड़कर हाथी का आकार दिया। तो किसी छात्र ने अपनी कलात्मकता से मिट्टी में भी जान फूंक दी। दिव्यांग बच्चों द्वारा मेज पर सजाए गए हर आर्ट क्राफ्ट आकर्षण का केंद्र रहा। कक्षा आठवीं के मुखबाधित छात्र राजू नाग ने पेपर और आइस क्रीम स्टिक से खरगोश, उल्लू, टेडी बियर , फूलदान जैसी सजावटी वस्तुएं बनाई। तो वहीं कक्षा बारहवीं के अधिगम अक्षम छात्र राजू मौर्य ने मिट्टी को आकार देकर बिल्ली, गणेश की प्रतिमा जैसी कलाकृतियों को मूर्त रूप दिया। प्रदर्शनी में नेल एंड थ्रेड आर्ट भी अपनी खास जगह बनाए हुए था, जिसे कक्षा आठवीं के अस्थिबाधित छात्र रोहित माड़वी ने बनाया है। ऐसे ही बहुत से विशेष छात्रों ने अपनी कलात्मकता से कागज, थर्मोकोल सहित और बहुत सी चीज़ों से आकर्षित करने वाली वस्तुएं तैयार कर प्रदर्शित की।
विदित हो कि प्रतिवर्ष 3 दिसम्बर का दिन दुनियाभर में दिव्यांगों की समाज में मौजूदा स्थिति, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने तथा सुनहरे भविष्य हेतु विचार विमर्श करने के लिए जाना जाता हैं। दरअसल यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक मुहिम का हिस्सा है। जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों को मानसिक रूप से सबल बनाना तथा अन्य लोगों में उनके प्रति सहयोग की भावना का विकास करना है। विश्व दिव्यांग दिवस की औपचारिक शुरूआत वर्ष 1992 से हुई थी। हमारे सामने वैज्ञानिक व खगोलविद स्टीफन हॉकिंग जैसे लोगों की लम्बी फेहरिस्त हैं, जिन्होंने दिव्यांगता को कमजोरी नहीं समझा, बल्कि चुनौती के रूप में स्वीकार किया और आज हम उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें याद करते हैं।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
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