जिले की 282 ग्राम पंचायतें पहले ही घोषित हो चुकी हैं बाल विवाह मुक्त, शेष 268 पंचायतों पर रहेगा प्रशासन का फोकस
रायगढ़, 24 अक्टूबर 2026। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए रायगढ़ जिला प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। जिले की ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने के उद्देश्य से आगामी 27 नवंबर को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इन सभाओं में बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत घोषित करने के प्रस्ताव रखे जाएंगे और नियमानुसार पारित कराए जाएंगे। इस अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से प्रभावी बनाने के लिए कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर जिला पंचायत के सभाकक्ष में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में अधिकारियों को बाल विवाह की रोकथाम, कानूनी प्रावधानों, विभागीय जिम्मेदारियों और ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
282 ग्राम पंचायतें बाल विवाह मुक्त, शेष 268 पर जोर
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास अरुण कुमार पाण्डेय ने बताया कि वर्ष 2025-26 में रायगढ़ जिले की 282 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है। अब शेष 268 ग्राम पंचायतों को भी इस सामाजिक कुरीति से मुक्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले की कुल ग्राम पंचायतों में से 60 प्रतिशत को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पहले से बाल विवाह मुक्त घोषित पंचायतों में भी लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि वहां दोबारा बाल विवाह की घटनाएं न हों।
विशेष ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कराने के निर्देश
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत बबन पठारे ने कार्यशाला में अधिकारियों को निर्देश दिए कि 27 नवंबर को होने वाली विशेष ग्राम सभाओं में बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत का प्रस्ताव अनिवार्य रूप से रखा जाए और नियमानुसार पारित कराया जाए। उन्होंने निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने को कहा।
बाल विवाह रोकने के कानूनी प्रावधानों की जानकारी
जिला बाल संरक्षण अधिकारी धीरेंद्र कुमार शर्मा ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों और कानूनी अधिकारों से अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव, सेक्टर स्तर पर पर्यवेक्षक, परियोजना स्तर पर परियोजना अधिकारी और जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है।
अभियान के तहत पंचायत स्तर पर विवाह पंजी का संधारण किया जाएगा। ग्राम सभा, ग्राम पंचायत और नगरीय निकायों में बाल विवाह मुक्त घोषित करने संबंधी प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इसके बाद दावा-आपत्ति के प्रकाशन और अनुशंसा सहित प्रस्ताव जिला स्तर पर भेजे जाएंगे। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम दावा-आपत्ति प्रकाशन के बाद नियमानुसार ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की कार्रवाई की जाएगी।
‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान पर भी प्रशिक्षण
कार्यशाला में बाल विकास परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को विभागीय कार्यों की जानकारी देने के साथ ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान के संबंध में भी प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों को बाल विवाह रोकने के लिए गांवों में जागरूकता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया गया।
बाल विवाह की सूचना 1098 पर देने की अपील
जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि कहीं भी बाल विवाह होने की जानकारी मिलने या इसकी आशंका होने पर तत्काल स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, सरपंच, पंचायत सचिव अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचना दें। समय पर मिली सूचना से बाल विवाह रोकने और बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने में मदद मिल सकती है।
कार्यशाला के अंत में जिला कार्यक्रम अधिकारी अरुण कुमार पाण्डेय ने जिला कार्यालय के कर्मचारियों, परियोजना अधिकारियों, पर्यवेक्षकों, जिला बाल संरक्षण इकाई के कर्मचारियों और चाइल्ड हेल्पलाइन समन्वयक सहित उपस्थित 120 अधिकारियों-कर्मचारियों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति की रोकथाम के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करने की सामूहिक शपथ दिलाई।











