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शिव आराध्य हैं देवों के देवाधिदेव रूप में…
मानव में महादेव, असुरों के महाकाल, शेष जीवों में पशुपतिनाथ के रूप में आराध्य हैं शिव…
शिव समस्त चर और अचर जगत में शक्ति के स्रोत हैं, पुंज हैं…
भक्तों को बिना रंग, रूप, जाति, वर्ण, गुण धर्म के विभेद के अभयता, अजेयता, अजरता, अमरता का वरदान प्रदान करते हैं शिव….
शिव भोलेनाथ हैं सहज मान जाने वाले, अल्प में प्रसन्न होने वाले,
एक लोटा जल, कुछ बेलपत्र और धतूरा… बस…
शिव सर्वव्यापी हैं, सर्वभौम हैं,
मंदिरों, शिवालयों की आवश्यकता नहीं…
नदी तीर, तालाब किनारे, कंदराओं में चौराओं में, पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे…
कहीं भी शिव को ध्या लो…
शिव की असाधारणता उनकी साधारणता में निहित है…
शिव भक्तों के प्रिय हैं, भक्त शिव के प्रिय….
शिव कल्याणकारी है प्राणी मात्र के लिए….
आइए शिव की इस धरती को आप हम मिलकर शिवमय बनाएं, प्रेममय बनाएं…..
शिवरात्रि की शुभकामनाएं सहित…
हर हर महादेव
वीरेंद्र शाह, लैलूंगा









