पढ़ते हैं स्कूल में, शौच को जाते हैं खेत में चांदनी बिहार पुर के नवीन महाविद्यालय एवं हाई सेकेंडरी के बच्चे….

पढ़ते हैं स्कूल में, शौच को जाते हैं खेत में चांदनी बिहार पुर के नवीन महाविद्यालय एवं हाई सेकेंडरी के बच्चे

सरकारें स्वच्छ भारत मिशन का नारा बुलंद कर रही हैं, घर-घर शौचालय बनवाओ सरकारी स्कूलों में शौचालय ही नहीं शौचालय भी है तो बुरी तरह खंडहर सफाई का नाम नहीं

चांदनी बिहार पुर से लाल बहादुर यादव की रिपोर्ट

सूरजपुर जिला के दूरस्थ क्षेत्र चांदनी बिहार पुर के नवीन विद्यालय एवं शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों में सही ढंग से शौचालय की व्यवस्था ना होने के कारण वहां के छात्र-छात्राओं को शौच के लिए बाहर खेत में जाना पड़ता है
पढ़ते हैं स्कूल में, शौच को जाते हैं खेत मेंसरकारें स्वच्छ भारत मिशन का नारा बुलंद कर रही हैं, घर-घर शौचालय बनवाए जा रहे हैं। इसके लिए अनुदान दिया जा रहा है। जिन बच्चों को स्कूलों में स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाता है, वह बच्चे ही खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। बिहार पुर नवीन महाविद्यालय एवं शासकीय हाई सेकेंडरी स्कूल में स्थिति बेहद खराब है। यहां बच्चों के लिए शौचालय अब तक शौचालय सही ढंग से नहीं बन पाया है शौचालय है भी तो पानी का व्यवस्था नहीं सफाई का तो नाम ही नहीं खंडहर से तब्दील है शौचालय दरवाजे भी नहीं यहां एक जगह पर तिन विद्यालय है विद्यालय मेंलगभग 4 से 500 के बीच बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें छात्र लगभग ढाई से 300 और छात्राएं की संख्या डेढ़ सौ से 200 है। बच्चों को शौच के लिए सड़क पार कर खेतों में जाना पड़ता है। शौचालय न होने के कारण छात्र-छात्राओं भारी दिक्कत होती है आज करीब कई सालों से यहां पर स्कूल है लेकिन आज तक शौचालय नहीं बन पाया। शिक्षा विभाग एवं प्रधान पाठकों की लापरवाही से यहां की स्थिति बहुत खराब है यहां के जनप्रतिनिधियों एवं जिला शिक्षा अधिकारी का आवागमन हमेशा बना रहता है लेकिन शौचालय व स्कूलों में नजर नहीं पड़ती चांदनी क्षेत्र में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही ऐसे कई स्कूले हैं जहां शौचालय नहीं शौचालय है तो पानी नहीं यहां तक की कई जगहों की स्कूल खंडहर में तब्दील हैं बच्चों को भाड़े पर रूम लेकर पढ़ाया जा रहा है सरकार शिक्षा विभाग को कई करो रुपए साल में खर्चा करती है पर शिक्षा विभाग की लापरवाही से पैसे का सही ढंग से प्रयोग नहीं किया जा रहा है भ्रष्टाचार एवं दुरुपयोग किया जा रहा है इसीलिए शौचालय बनवाने को पहल नहीं हो सकी।

क्या कहते हैं बच्चे

शौचालय न होने के कारण हमें या तो खेतों पर जाना पड़ता है या फिर दूसरे स्कूल में जाना पड़ता है। कई बार शौचा के लिए हम घर जाते हैं
शौचालय न होने के कारण काफी दिक्कत होत�

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
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