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धान खरीदी लिमिट पर बवाल : लैलूंगा के किसानों का फूटा गुस्सा, 17 दिसंबर को मंडी के बाहर तालाबंदी व शांतिपूर्ण हड़ताल का ऐलान

धान खरीदी लिमिट पर बवाल: लैलूंगा के किसानों का फूटा गुस्सा, 17 दिसंबर को मंडी के बाहर तालाबंदी व शांतिपूर्ण हड़ताल का ऐलान

रिपोर्ट ~ हीरालाल राठिया लैलूंगा


लैलूंगा। धान उपार्जन केन्द्र लैलूंगा में प्रतिदिन की खरीदी लिमिट को लेकर किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लघु एवं दीर्घकालीन किसान धान बिक्री में आ रही गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। किसानों का कहना है कि वर्तमान में धान खरीदी केन्द्र लैलूंगा की दैनिक खरीदी लिमिट मात्र 1110 क्विंटल निर्धारित की गई है, जो क्षेत्र के किसानों के लिए बिल्कुल नाकाफी साबित हो रही है।

किसानों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, लैलूंगा को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि यदि प्रतिदिन कम से कम 2500 क्विंटल धान की खरीदी नहीं की गई, तो निर्धारित समय-सीमा 31 जनवरी 2026 तक किसानों का धान बिक पाना असंभव है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

टोकन व्यवस्था बनी किसानों की परेशानी

धान खरीदी के लिए जारी की जा रही टोकन व्यवस्था भी किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है। सीमित खरीदी के कारण कई किसानों के टोकन होने के बावजूद धान नहीं बिक पा रहा है। इससे न सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है बल्कि किसानों को बार-बार मंडी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। छोटे किसान, जो अपनी उपज जल्दी बेचकर आर्थिक जरूरतें पूरी करना चाहते हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

समय सीमा बनी सबसे बड़ी चिंता

किसानों का कहना है कि यदि खरीदी की रफ्तार इसी तरह धीमी रही, तो समय सीमा समाप्त होने के बाद भी बड़ी मात्रा में धान बच जाएगा। ऐसे में उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। किसानों ने चेतावनी दी है कि बाद में किसी भी तरह की जिम्मेदारी किसानों पर नहीं डाली जाए।

17 दिसंबर को तालाबंदी और हड़ताल का ऐलान

अपनी मांगों को लेकर किसानों ने अब आंदोलन का रास्ता चुन लिया है। किसान संगठनों एवं प्रभावित किसानों ने 17 दिसंबर 2025 को सुबह 9:00 बजे से मंडी प्रांगण के बाहर तालाबंदी एवं शांतिपूर्ण हड़ताल का ऐलान किया है। आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक दैनिक धान खरीदी की लिमिट नहीं बढ़ाई जाती।

किसानों ने साफ कहा है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रशासन से जल्द निर्णय की मांग

किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि जमीनी हकीकत को समझते हुए तुरंत खरीदी लिमिट बढ़ाई जाए, ताकि सभी किसानों का धान समय पर खरीदा जा सके। किसानों का कहना है कि धान ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और खरीदी में देरी उनके परिवारों को आर्थिक संकट में डाल सकती है।

क्षेत्र में बढ़ता समर्थन

लैलूंगा सहित आसपास के गांवों के किसान भी इस आंदोलन के समर्थन में सामने आ रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक केंद्र की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों की समस्या है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन का दायरा और बढ़ सकता है।

नजरें प्रशासन पर

अब सभी की निगाहें प्रशासन के फैसले पर टिकी हुई हैं। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि शासन-प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगा। वहीं, यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आने वाले दिनों में लैलूंगा धान मंडी किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बन सकती है।

अब सवाल यही है—क्या किसानों की आवाज़ सुनी जाएगी या फिर धान खरीदी लिमिट किसानों की कमर तोड़ती रहेगी?

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