
सारंगढ़-बिलाईगढ़। ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ग्राम पंचायत पेंड्रावन एवं धनसीर में उद्यमिता जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया जा रहा है। जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग, सारंगढ़-बिलाईगढ़ के मार्गदर्शन तथा [Positive Mantra Consultancy Services Pvt. Ltd.](https://positivemantra.com?utm_source=chatgpt.com) रायपुर के सहयोग से आयोजित यह 14 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 मई 2026 से 3 जून 2026 तक संचालित किया गया।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य जिले की बालिकाओं, महिलाओं एवं संभावित उद्यमियों को उद्यमिता के प्रति जागरूक कर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
उद्यमिता विकास से लेकर व्यवसाय स्थापना तक मिला व्यवहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को उद्यमिता विकास, व्यवसाय प्रारंभ करने की प्रक्रिया, एमएसएमई पंजीकरण, वित्तीय प्रबंधन, बाजार की संभावनाओं तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न उद्यम प्रोत्साहन योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने नए व्यवसाय के अवसरों की पहचान, उद्यम संचालन की चुनौतियों और सफलता के उपायों पर भी मार्गदर्शन दिया।
महिलाओं ने दिखाई विशेष रुचि, बिहान समूह की रही उल्लेखनीय भागीदारी
कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि बिहान समूह से जुड़ी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं ने स्वरोजगार और लघु उद्योगों से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अपनी रुचि दिखाई। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें स्थानीय संसाधनों के आधार पर व्यवसाय स्थापित करने तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए प्रेरित किया गया।
आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में सार्थक पहल
आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उद्यमिता जागरूकता कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों में आत्मविश्वास का संचार हुआ है और उन्हें अपने सपनों को व्यवसाय के रूप में साकार करने की नई दिशा मिली है।
ग्रामीण अंचलों में आयोजित यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करने का भी कार्य कर रही है।









