हमारी जनगणना-हमारा विकास के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ तैयार

आलेख – रमेश जायभाये, उपनिदेशक, पत्र सूचना कार्यालय
क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर की छोटी-सी जानकारी—जैसे पानी, बिजली या परिवार के सदस्यों का विवरण—देश के विकास में कितना बड़ा योगदान दे सकती है? दरअसल, हर नागरिक की दी गई जानकारी मिलकर ही भारत के भविष्य की दिशा तय करती है।
इसी कड़ी में वर्ष 2027 की जनगणना एक खास पड़ाव बनने जा रही है। यह केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बदलते भारत की एक नई कहानी है—एक ऐसी कहानी जिसमें हर नागरिक की भागीदारी है। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल अंदाज़ में होगी, जो इसे पहले की सभी जनगणनाओं से अलग और अधिक आधुनिक बनाती है। छत्तीसगढ़ में इस महाअभियान को लेकर तैयारियाँ तेज़ी से पूरी की जा रही हैं। वातावरण ऐसा है मानो कोई बड़ा जनउत्सव आने वाला हो—और वास्तव में, यह एक ऐसा अभियान है जिसमें हर व्यक्ति की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
कहानी शुरू होती है इतिहास से…
भारत में जनगणना की शुरुआत 1872 में हुई थी और 1881 से इसे पूरे देश में व्यवस्थित रूप से लागू किया गया। स्वतंत्रता के बाद 1951 में पहली जनगणना आयोजित हुई, जिसने देश के विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई। अब वर्ष 2027 की जनगणना इस ऐतिहासिक यात्रा का आधुनिक रूप है। यह न केवल देश की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगी, बल्कि भविष्य की योजनाओं की नींव भी तैयार करेगी। छत्तीसगढ़ में यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी—पहला चरण अप्रैल-मई 2026 में और दूसरा फरवरी-मार्च 2027 में आयोजित किया जाएगा। राज्य के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 (रात 12 बजे) निर्धारित की गई है, जिसके आधार पर प्रत्येक व्यक्ति की गणना की जाएगी।
अब आपकी बारी: खुद करें अपनी जनगणना!
इस बार जनगणना की सबसे रोचक और उपयोगी सुविधा है—स्व-गणना अब आप स्वयं अपने घर और परिवार की जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 के बीच वेबपोर्टल पर जाकर मोबाइल नंबर और ओटीपी के माध्यम से लॉगिन कर यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। आपसे परिवार के सदस्यों की संख्या, उनकी आयु, शिक्षा, व्यवसाय और घर की सुविधाओं से जुड़े कुछ सरल प्रश्न पूछे जाएंगे। पूरी जानकारी भरने के बाद आपको एक एसई आईडी प्राप्त होगी। जब प्रगणक आपके घर आएंगे, तो केवल यह आईडी दिखानी होगी और आपकी जानकारी सत्यापित कर ली जाएगी—यानी बार-बार जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जनगणना के दौरान किसी भी प्रकार के दस्तावेज़ दिखाने की आवश्यकता नहीं होती। आप जो जानकारी देंगे, वही दर्ज की जाएगी। स्व-गणना के प्रति लोगों का रुझान भी तेजी से बढ़ रहा है—देशभर में लाखों परिवार इस सुविधा का उपयोग कर चुके हैं, जो इस डिजिटल पहल की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
स्मार्ट तकनीक, सटीक आंकड़े और भरोसेमंद प्रक्रिया
इस बार जनगणना पूरी तरह तकनीक के सहारे संचालित होगी। प्रगणक मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा दर्ज करेंगे, जिससे काम तेज़ और अधिक सटीक होगा। साथ ही, आधुनिक जीआईएस आधारित डिजिटल मैपिंग का उपयोग कर हर क्षेत्र और गणना ब्लॉक को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया जा रहा है, ताकि कोई भी घर या व्यक्ति छूट न जाए। डेटा के बेहतर प्रबंधन और निगरानी के लिए उन्नत डिजिटल सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहती है। एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में, इस बार जाति संबंधी आंकड़ों का भी समावेश किया जाएगा, जो दशकों बाद समाज की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करेगा।
जनगणना में समाज के हर वर्ग को शामिल करने का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसी के तहत बेघर व्यक्तियों की गणना भी अलग से, विशेष अभियान के माध्यम से की जाती है, ताकि कोई भी नागरिक इस प्रक्रिया से वंचित न रह जाए।और जहाँ तक आपकी जानकारी की सुरक्षा का सवाल है—यह पूरी तरह गोपनीय रहती है। इसे किसी अन्य विभाग या एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जाता।
छत्तीसगढ़ तैयार, अब आपकी भागीदारी जरूरी
छत्तीसगढ़ में इस अभियान के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियाँ की गई हैं। शहरों से लेकर गाँवों तक, हर क्षेत्र में जनगणना टीम सक्रिय रहेगी, ताकि कोई भी परिवार छूट न जाए। नागरिकों की सुविधा के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 भी जारी किया गया है, जहाँ किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता प्राप्त की जा सकती है। लेकिन इस पूरे अभियान की असली ताकत है—आपकी भागीदारी। जब आप सही जानकारी देते हैं, तो आप केवल एक फॉर्म नहीं भरते, बल्कि अपने क्षेत्र के विकास में योगदान देते हैं। आपकी दी गई जानकारी से ही तय होता है कि कहाँ नई सड़क बनेगी, कहाँ स्कूल खुलेगा और कहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत है।
आखिर में एक छोटी-सी बात…
जनगणना एक आईना है, जिसमें देश खुद को देखता है। इस बार यह आईना डिजिटल है—तेज़, सटीक और आधुनिक और इसमें जो तस्वीर दिखेगी, उसे बनाने में आपका भी योगदान होगा। तो आइए, इस जनगणना अभियान का हिस्सा बनें—स्व-गणना करें, सही जानकारी दें और देश के विकास की कहानी में अपनी भूमिका निभाएं।

चंद्रशेखर जायसवाल
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