
बिलासपुर संभाग हेड सुखदेव आजाद
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।
जिले के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की समृद्धm सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक जीवनशैली तथा स्थानीय कृषि उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को खासा प्रभावित किया। भ्रमण के दौरान मेहमानों ने बैगा जनजाति की संस्कृति, लोक परंपराओं और देशी आमों की अनूठी मिठास का अनुभव किया तथा स्थानीय लोगों के साथ आत्मीय संवाद भी किया।लमना, बस्तीबगरा और आमगांव के दौरे के दौरान अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने अपनी लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और जनजातीय जीवनशैली से परिचित कराया। बैगा समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव ने मेहमानों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
इस अवसर पर प्रस्तुत गौरा-गौरी लोक नृत्य कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।

लोक कलाकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों पर मनमोहक प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलक दिखाई। नृत्य की जीवंतता और सांस्कृतिक रंगों ने विदेशी मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर दिया।भ्रमण के दौरान अतिथियों ने क्षेत्र में उपलब्ध देशी आमों का स्वाद भी चखा। आमों की प्राकृतिक मिठास और विशिष्ट स्वाद की उन्होंने सराहना की। साथ ही ग्रामीणों द्वारा अपनाई जा रही पारंपरिक खेती और स्थानीय उत्पादों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।अंतरराष्ट्रीय मेहमानों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोक कलाएं और ग्रामीण जीवन की सादगी अद्वितीय है यहां की परंपराएं, लोकनृत्य और लोगों का आत्मीय व्यवहार लंबे समय तक उनकी स्मृतियों में बना रहेगा
यह भ्रमण न केवल जिले की सांस्कृतिक और पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर बना,बल्कि स्थानीय परंपराओं और जनजातीय विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ







